अफगानिस्तान में इन मुस्लिम देशों की भूमिका से चिंता में आया सऊदी अरब, भारत से साधा संपर्क

अफगानिस्तान (Afghanistan Crisis) में कतर, पाकिस्तान (Pakistan) और तुर्की की सक्रिय भूमिका को लेकर सऊदी अरब (Saudi Arabia) चिंता में है. पाकिस्तान ने अपनी कमर्शियल फ्लाइट्स का संचालन काबुल के लिए शुरू कर दिया है. काबुल एयरपोर्ट (Kabul Airport) के टेक्निकल ऑपरेशन का जिम्मा कतर संभाल रहा है.

तालिबान (Taliban) के अफगानिस्तान (Afghanistan) पर नियंत्रण से चिंता में हैं. ये मसला सऊदी अरब (Saudi Arabia) के लिए कितना अहम है कि इस हफ्ते के अंत में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैजल बिन फरहान (Faisal bin Farhan Al-Saud) के भारत (India Visit) का दौरा करने की उम्मीद है. दरअसल, ये देश अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के गठन और उसे कानूनी मान्यता देने में कतर की भूमिका को लेकर परेशान हैं. सऊदी अरब का मानना है कि तालिबान के आने के बाद क्षेत्र में सिक्युरिटी से जुड़े मसले पैदा हो सकते हैं.

कई मुस्लिम देशों से नाराज है सऊदी अरब और यूएई
दोनों खाड़ी देश अफगानिस्तान में कतर, पाकिस्तान और तुर्की की सक्रिय भूमिका को लेकर चिंता में है. पाकिस्तान ने अपनी कमर्शियल फ्लाइट्स का संचालन काबुल के लिए शुरू कर दिया है. काबुल एयरपोर्ट के टेक्निकल ऑपरेशन का जिम्मा कतर संभाल रहा है. जबकि तालिबान सरकार सिक्युरिटी का जिम्मा तुर्की आर्मी को देने के बारे में सोच रही है.

खुद कतर के विदेश मंत्री अब्दुल रहमान अल थानी और विशेष दूत माजेद अल कुहतानी बीते रविवार को काबुल में थे. हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अभी तक तालिबान को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन पाकिस्तान आईएसआई तालिबान को फौजी और राजनीतिक मदद दे रहा है.

भारत के संपर्क में है सऊदी अरब-यूएई
अफगानिस्तान के ताजा हालात पर चर्चा के लिए सऊदी विदेश मंत्री का भारत दौरा 19 सितंबर तक हो सकता है. इससे पहले तीन नवंबर को पीएम मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जाएद अल नहान के साथ फोन पर बात की थी. इसके अलावा विदेश मंत्री जयशंकर भी यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार के साथ काबुल संकट पर बात कर चुके हैं.

Related posts