अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर संगम नगरी में लंबी उम्र के लिए प्रार्थना

हिंदी सिनेमा के शहंशाह महानायक अमिताभ बच्चन का आज जन्मदिन मनाया जा रहा है। देश-विदेश के प्रशंसकों के साथ उनकी जन्मस्थली प्रयागराज में उत्साह का माहौल है। अमिताभ का 12 वर्षों से जन्मदिन मनाने वाली संस्था प्रयागराज सेवा समिति सोमवार को वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित करेगी। संस्था के कार्यालय व नगर देवता वेणीमाधव मंदिर में पूजन करके अमिताभ की चिरायु की कामना की जाएगी। संस्था के सांस्कृतिक मंत्री विष्णु दयाल श्रीवास्तव मुंबई से अमिताभ के बंगले के पास अमिताभ चालीसा का पाठ करेेंगे। उसका इंटरनेट मीडिया में प्रसारण किया जाएगा।

पहले इंकलाब रखा गया था अमिताभ का नाम

11 अक्टूबर 1942 को प्रयागराज में जन्मे अमिताभ बच्चन हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन व तेजी बच्चन के पुत्र हैं। अमिताभ के जन्म के समय देश में स्वतंत्रता संग्राम का दौर था। इसी कारण इनका नाम इंकलाब रखा गया। बाद में हरिवंश राय के मित्र व प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत ने इनका नाम अमिताभ रखा। शुरुआत में ज्ञान प्रबोधिनी व ब्वायज हाईस्कूल से शुुरुआती शिक्षा ग्रहण किया। अमिताभ का प्रयाग भले कम आना-जाना हो, लेकिन यहां के लोगों के दिलों में आज भी उनके प्रति आत्मीय सम्मान है। अमिताभ उनके बेटे अभिषेक व बहु ऐश्वर्या कोरोना से पीडि़त हुए थे प्रयागराज के लोग बेचैन हो गए थे। साहित्यकार व कलाकार व्यथित थे।

बोले, वो देखो छोरा गंगा किनारे वाला…

इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष, हिंदी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री श्यामकृष्ण पांडेय अतीत में खोते हुए 37 वर्ष पीछे जाते हैं। वह 1984 में इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र के चुनाव को याद करते हैं, जिसमें अमिताभ विजयी हुए थे। चुनावी सभा के मंच पर अमिताभ, सांसद केपी तिवारी के साथ श्यामकृष्ण पांडेय भी मौजूद थे। सभा मेजा रोड पर आयोजित हुई थी। एक दिन पहले चुनाव के प्रतिद्वंद्वी कद्दावर नेता हेमवतीनंदन बहुगुणा की तरफ से अमिताभ पर तंज कसते हुए एक पोस्टर जारी किया गया था। जिसमें बोल्ड शब्दों में छपा था, मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है…। मतलब की मुम्बई से यहां चुनाव में आ गए हो। अमिताभ चतुर राजनेता की तरह उनकी बात भांप गए थे। सभा में जवाब देते हुए कहा कि बहुगुणा जी मेरे बड़े बुजुर्ग और पिता समान हैं। बचपन से हमें बुजुर्गों का सम्मान करना सिखया गया है। मैं उनकी बात को काटूंगा नहीं। लेकिन इसमें मेरा क्या कसूर की मैं इलाहाबाद (प्रयागराज) की पवित्र धरती पर पैदा हुआ। देश या दुनिया में जहां भी गया यही आवाज आई, वो देखो-अमिताभ बच्चन। छोरा गंगा किनारे वाला। यह सुनकर मंच के नीचे मौजूद लोगों की खुशी व उत्साह आसमान छूने लगा। कोई 25 हजार से ज्यादा लोग थे सभा में। तालियां बजना और समर्थन का हाथ उठाकर बहुत देर तक तक नारे लगने का सिलसिला लगातार चला। जब बच्चन बोलने के लिए शुरू हों और कहें भाइयों, फिर ताली बजती और  जिंदाबाद के नारे लगने लगते थे। असल में अपनी ही फिल्म के गाने के जरिये बच्चन ने बेहद शालीनता से जवाब दे दिया था, बहुगुणा जी के पोस्टर का। अमिताभ की बात का सारांश ये था कि मैं इलाहाबाद की मिट्टी का बेटा हूं। आप तो गढ़वाल से आकर यहां बसे हो। इलाहाबाद तो कास्मोपोलिटन शहर है, सबको अपना लेता है। आप मुझ पर क्यों बाहरी होने की बात लगा रहे हैं? वो कचहरी की नामांकन सभा के बाद बच्चन की पहली चुनाव सभा थी। चुनाव का परिणाम उसी दिन तय हो गया था। जहां जहां बच्चन गए, ऐतिहासिक सभा हुई। बहुगुणा जी जैसे बड़े नेता जिन्होंने प्रयागराज के लिए बहुत कुछ किया था, चुनाव में बुरी तरह पराजित हो गए।

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