आसान नहीं अध्यक्ष चयन पर सहमति, वैष्णव सम्प्रदाय के अखाड़े बैठक का करेंगे बहिष्कार

महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नए अध्यक्ष की तलाश चल रही है। दावेदारों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। हर प्रमुख अखाड़ा अध्यक्ष पद चाहता है। कुछ सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं, वहीं कुछ के तेवर कड़े हैं। ऐसे में नया अध्यक्ष सहमति से चुना जाएगा, उसकी संभावना फिलहाल नहीं दिखती। जिसका पलड़ा भारी होगा, वही संतों की सबसे बड़ी संस्था के इस प्रतिष्ठित पद पर काबिज होगा।

श्री महंत रवींद्र पुरी हो सकते हैं दावेदार 

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की 20 सितंबर को मृत्यु होने के बाद से अध्यक्ष पद खाली है। नया अध्यक्ष चुनने के लिए 25 अक्टूबर को श्रीनिरंजनी अखाड़ा प्रयागराज में अखाड़ा परिषद की बैठक प्रस्तावित है। वैष्णव सम्प्रदाय के श्रीदिगंबर अनी, श्रीनिर्मोही अनी व श्रीनिर्वाणी अनी अखाड़ों ने बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि बैठक की तारीख पर उनसे कोई चर्चा नहीं हुई, न ही कोई सूचना दी गई है। मनमानी करते हुए तारीख घोषित की गई है। श्रीनिर्मोही अनी अखाड़ा के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास खुद को परिषद अध्यक्ष के दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं। अगर परंपरा को देखें तो जिस अखाड़े के महात्मा पदाधिकारी रहते हुए ब्रह्मलीन (मृत्यु) होते हैं। बाद में उसी अखाड़े के दूसरे महात्मा को उक्त पद पर आसीन किया जाता है। नरेंद्र गिरि श्रीनिरंजनी अखाड़ा के सचिव थे। ऐसी स्थिति में श्रीनिरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार हैं। अगर चुनाव की स्थिति आती है तो श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी अध्यक्ष पद के दावेदार हो सकते हैं, क्योंकि उनके अखाड़े से कई सालों से कोई इस पद पर आसीन नहीं हुआ।

श्री महंत देवेंद्र शास्त्री भी आ सकते हैं पद पर

अगर उपाध्यक्ष को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाकर पांच साल का कार्यकाल पूरा कराने का निर्णय हुआ तो श्रीपंचायती निर्मल अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत देवेंद्र शास्त्री इस पद पर आसीन हो जाएंगे, क्योंकि वो अभी परिषद के उपाध्यक्ष हैं। वैष्णव अखाड़ा परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास का कहना है कि 25 अक्टूबर की बैठक में वैष्णव सम्प्रदाय के अखाड़े शामिल नहीं होंगे। हम तभी शामिल होंगे जब नियमानुसार 26 सदस्य बैठक में आएंगे, 27वें व्यक्ति के होने पर उसमें भाग नहीं लेंगे। अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि कहते हैं कि हर अखाड़े को पद मांगने का अधिकार है। उन्हें पुरजोर तरीके से मांग उठानी भी चाहिए, लेकिन अंतिम निर्णय आपसी सामंजस्य से होगा।

2025 तक है कार्यकाल

अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों का कार्यकाल पांच साल के लिए होता है। नरेंद्र गिरि 2014 में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष बने थे। कार्यकाल खत्म होने पर उन्हें 10 अक्टूबर 2019 को दोबारा अध्यक्ष चुना गया, जिसका कार्यकाल 2025 तक चलेगा।

अखाड़ा परिषद में हैं 26 सदस्य

13 अखाड़ों में आपसी सामंजस्य स्थापित करने के लिए 1954 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का गठन हुआ है। इसमें हर अखाड़े के दो-दो सदस्य अर्थात कुल 26 सदस्य होते हैं। हर अखाड़ा संगठन के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सचिव व श्रीमहंत को अखाड़ा परिषद के लिए नामित करता है। वो परिषद में अखाड़े का प्रतिनिधित्व करते हैं। अध्यक्ष सहित समस्त पदों का चुनाव हाथ उठवाकर करवाया जाता है। जिसके पक्ष में ज्यादा लोग हाथ उठाते हैं उसी को पद पर आसीन किया जाता है।

2014 से थे 28 सदस्य

2014 से अखाड़ा परिषद में 28 सदस्य हो गए थे। अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि व महासचिव महंत हरि गिरि अतिरिक्त सदस्य थे, क्योंकि उनके अखाड़े से दो-दो सदस्य पहले से नामित थे, लेकिन परिषद का महत्वपूर्ण पद होने के कारण उनको लेकर कोई आपत्ति नहीं थी। अब संख्या अधिक होने पर भी आपत्ति हो रही है।

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