इंदिरा मैराथन का 36 वां संस्करण

इंदिरा मैराथन का 36 वां संस्करण आजसुबह यहां 6.34 बजे शुरू होकर समाप्त हो चुकी है। कुल 42.195 किमी लंबी दौड़ आनंद भवन से सुबह 6.34 बजे शुरू होने के बाद 8.54 पर समाप्त हो गई जिसमें महिला-पुरुष वर्ग में वलीअप्पा और नीलिमा ने पहले स्थान पर जीत हासिल की

पुरुष वर्ग में वलीयप्पा ने प्रथम स्थान पर रहकर जीत हासिल की

देश भर में विख्यात अखिल भारतीय प्राइज मनी इंदिरा मैराथन का 36 वां संस्करण आज शुक्रवार की सुबह यहां शुरू हो गया था। पुरुष में सेना के वलीयप्पा चेस्ट नंबर 1202 ने पहले स्थान पर रहकर जीत हासिल की। दूसरे स्थान पर रहे प्रयागराज के अनिल सिंह चेस्ट नंबर 1217। हिमाचल के हेतराम ने तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया। तीनों धावक सेना के हैं। हेतराम ने 2019 में भी इस मैराथन में तीसरा स्थान हासिल किया था। हेतराम डोगरा रेजीमेंट नासिक में तैनात हैं। इसी साल ढाका इंटरनेशनल मैराथन में भी उन्होंने तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया था।

महिला वर्ग में नीरमा बेन ने प्रथम स्थान पर रहकर जीत हासिल की

महिला वर्ग में गुजरात की नीरमा बेन प्रथम, आरती पाटिल दूसरे और मीरजापुर की तमसी सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया है। इस बार आयोजन में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर है। धावकों के जूतों में चिप लगाए गए हैं। इसके लिए स्पेशलिस्ट टीम दिल्ली से आई। कुल 42.195 किमी लंबी दौड़ आनंद भवन से सुबह 6.34 बजे शुरू हो चुकी है। प्रदेश के  खेल मंत्री उपेंद्र तिवारी के हरी झंडी दिखाने पर पहले 6.32 पर महिला धावक और 6.34 बजे पुरुष धावक दौड़े। मैराथन पंडित मदनमोहन मालवीय स्टेडियम में खत्म हो गई। पुरुष व महिला वर्ग में चैैंपियन बनने वाले धावक को दो -दो लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। उपविजेता को एक लाख रुपये मिलेंगे। तीसरे स्थान पर रहने वाले धावक को 75 हजार व 11 सांत्वना पुरस्कार क्रमश:10-10 हजार रुपये के होंगे। खेल मंत्री ने अपने संबोधन में विजेता राशि बढ़ाने के संकेत दिए हैं। सुबह पांच बजे से ही धावक समेत शहर के उत्साही खेल समर्थक आनंद भवन पर एकत्र होने लगे थे। धावकों का रास्ते में जगह जगह पर ताली बजाकर और फूल बरसाकर स्वागत किया जाता रहा।

कोरोना महामारी के संक्रमण के कारण वर्ष 2020 में इंदिरा मैराथन का आयोजन नहीं हुआ था। इससे धावकों को मायूसी हुई थी। इस बार सिर्फ मैराथन दौड़ हो रही है। क्रास कंट्री रेस तथा वेटरन वर्ग में दौड़ नहीं हुई है। इस बार सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे रूट पर नजर रखी जा रही है। रूट भी सात किलोमीटर बदला है। रीवा रोड पर दांदूपुर तक धावक जाएंगे। खेल निदेशालय के इस आयोजन में एथलेटिक फेडरेशन आफ इंडिया के टाइमिंग पार्टनर इनोवेशन ई सोल्यूशन एलएलपी को टेक्नोलाजी से संबंधित पूरी जिम्मेदारी दी गई है। फेडरेशन की टेक्निकल टीम बुधवार को ही यहां पहुंच गई। गुरुवार को आठ सदस्यीय टीम ने आनंद भवन, दांदूपुर में रूट मोड़ व मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में उपकरण स्थापित किए थे। स्टेडियम में काउंटर लगाकर धावकों को चेस्ट स्लिप (बिब नंबर) के साथ चिप बांटी गई। धावक अपने घुटने से नीचे इसे पैर या जूते में बांधेंगे। टेक्निकल इंचार्ज महावीर सिंह ने बताया टाइमिंग मैट सिस्टम को जैसे ही धावक पार करेंगे, चिप एक्टीवेट हो जाएगी। यह चिप साफ्टवेयर से जुड़ी होगी और पूरा डाटा ट्रैक होता रहेगा। आनंद भवन के अलावा दांदूपुर में टर्निंग प्वाइंट पर टाइमिंग मैट लगाई गई है, धावकों को इसे पार करना आवश्यक होगा।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को हत्या कर दी गई थी। इसके अगले साल यानी 1985 में उनकी जन्मतिथि पर इस मैराथन की शुरुआत की गई। पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विजेताओं को पुरस्कृत किया था। तब इनामी राशि 51 हजार रुपये थी।

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