इलाहाबाद विश्वविद्यालय पहुंची स्वर्णिम विजय मशाल

आज एमएनएनआइटी में होगा मशाल का भव्य स्वागत

अतीत के गौरवशाली पल न सिर्फ वर्तमान को गौरवान्वित करते हैं बल्कि भविष्य की प्रेरणा भी बनते हैं। 134 साल पुराने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विजयनगरम हाल में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रज्वलित की गई स्वर्णिम विजय मशाल का भव्य स्वागत किया गया। विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल एस मोहन ने यह मशाल कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव को सौंपी। इसे कुलपति ने विजयनगरम हाल के सामने स्थापित किया। इससे पहले विजय मशाल काे हाईकोर्ट ले जाया गया, वहां पर जोरदार स्वागत किया गया था। आज एमएनएनआइटी में मशाल का भव्य स्वागत किया जाएगा।

यूनिविर्सटी में हुए कार्यक्रम में कुलपति ने कहा आज उन्हें 1971 के पल याद आ गए। जब वह छोटी थीं और युद्ध की विभीषिका से पूरे शहर में ब्लैकआउट हो जाता था। सायरन की आवाज सुनाई देती थी और जनजीवन थम गया था। 1971 का युद्ध भारतीय सेना के इतिहास में ही नहीं बल्कि विश्व सैन्य इतिहास में एक खास स्थान रखता है। कुलपति ने कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला के बलिदान का भी जिक्र किया। उन्होंने जनरल सैम मानेक शा के योगदान को खास तौर से रेखांकित किया। इसके बाद आर्मी बैंड द्वारा कई ओजपूर्ण गानों की धुन बजाई गई। जिनमें कदम कदम बढ़ाए जा, वंदेमातरम प्रमुख थे। इसके बाद संगीत विभाग के छात्रों द्वारा ”मेरा रंग दे बसंती चोला…” और ”ए मेरे वतन के लोगों…” जैसे भावपूर्ण गीतों की प्रस्तुति दी गई। सेना की धुन और संगीत विभाग के छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए। गीतों से पूरा माहौल ओजपूर्ण और भावपूर्ण हो गया।

कवि श्लेष गौतम ने अपनी देशभक्ति कविता का पाठ किया तथा प्रोफेसर राजाराम यादव ने ”जब सारी दुनिया सोती थी…” कविता का पाठ किया। अंत में मध्य भारत एरिया के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल एस मोहन ने कहा वह इस विजय मशाल को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लाकर गर्व की अनुभूति कर रहे हैं। 16 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार दिशाओं में मशाल को रवाना किया था। अब वह मशाल लौट रही हैं और यहां आई मशाल पूर्वी दिशा से आई है। इस मौके पर पूर्व यूपी एमपी सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल जय सिंह बैंसला, डा. जया कपूर, रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ल, मंगलवार को मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में मशाल पहुंचेगी। इससे पहले हाईकोर्ट ले जाई गई मशाल का मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने स्वागत किया। साथ ही मशाल को 1971 युद्ध के साक्षी रहे रिटायर कर्नल नरेंद्र सिंह परहर के घर हाशिमपुर रोड पर भी ले जाया गया।

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