इलाहाबाद हाईकोर्ट का CBI को आदेश आनंद गिरी की जमानत पर 4 हफ्ते में दे जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को आनंद गिरी की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। इस दौरान आनंद के अधिवक्ता ने उन्हें निर्दोष बताया। कहा कि महंत नरेंद्र गिरी का सुसाइड नोट संदिग्ध है। इस पर हाईकोर्ट ने CBI से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने दिया। जमानत अर्जी पर अधिवक्ता विनीत विक्रम, इमरानुल्ला खान और CBI के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश व संजय यादव ने बहस की। बाघंबरी मठ के महंत और अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र गिरी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 21 सितंबर से आनंद गिरी जेल में हैं।

20 सितंबर को अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ में नरेंद्र गिरी की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। इस मामले में आनंद गिरी, मंदिर के पूर्व पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी को गिरफ्तार कर नैनी सेंट्रल जेल भेजा गया था। इस मामले की जांच-पड़ताल CBI मुख्यालय से आई टीम कर रही है।

CBI ने आनंद गिरी समेत 3 आरोपियों को जांच के लिए रिमांड पर भी लिया था। इसके साथ ही CBI ने बाघंबरी गद्दी के महंत बलबीर गिरी महाराज और सेवादारों से भी कई बार पूछताछ की थी। CBI ने आनंद गिरी के लाई डिटेक्टर टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सीजेएम कोर्ट में आवेदन किया था। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

CBI ने इस मामले में दाखिल चार्जशीट में कहा था कि महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की थी। इसीलिए CBI ने तीनों आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306) और साजिशकर्ता (120 बी) की धाराएं लगाई हैं। CBI ने आनंद गिरी, आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी को मौत के लिए जिम्मेदार माना है।

करीब 2 महीने तक चली जांच पड़ताल में सुसाइड नोट की हैंड राइटिंग की फॉरेंसिक जांच कराई गई। जिसमें पाया गया कि सुसाइड नोट महंत नरेंद्र गिरी ने ही लिखा था। CBI की चार्जशीट के मुताबिक, अभी विवेचना पेंडिंग है। यानी आने वाले दिनों में कुछ और लोगों के नाम भी इस मामले में सामने आ सकते हैं।

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