उत्तराधिकारी तय करने में पंच परमेश्वर को निर्णय लेने का अधिकार नहीं

बाघम्बरी मठ में महंत नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी के संदर्भ में पंच परमेश्वर को निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। क्योंकि मठ का संविधान है कि वसीयत के आधार पर उत्तराधिकारी तय होगा और इस हिसाब से लगभग 200 करोड़ की संपत्ति वाले बाघम्बरी मठ में नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी सिर्फ बलवीर गिरि है। यह बात वसीयत तैयार करने वाले जिला न्यायालय के अधिवक्ता ऋषि द्विवेदी ने टीवी चैनलों से साक्षात्कार में कही।

एडवोकेट ऋषि द्विवेदी ने बताया कि नरेंद्र गिरि ने पहली वसीयत सात जनवरी 2010 को रजिस्टर्ड कराई, जिसमें उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया। लेकिन अगले साल उन्होंने वसीयत बदलने को कहा। बकौल ऋषि द्विवेदी नरेंद्र गिरि का कहना था कि बलबीर गिरि ध्यान नहीं दे रहे हैं इसलिए उनकी जगह आनंद गिरि के नाम वसीयत बनवानी है। इस पर 29 अगस्त 2011 को महंत जी ने दूसरी वसीयत पंजीकृत कराई, जिसमें आनंद गिरि को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 के बीच में जमीनों को लेकर आनंद गिरि से कुछ विवाद हो गया और वह मठ के हित में भी कार्य नहीं कर रहे थे। इस पर महंत जी ने चार जून 2020 को फिर अपनी वसीयत बदल दी और उस बदली हुई वसीयत में उन्होंने फिर बलबीर गिरि को पुनः अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। साथ ही इस नई वसीयत में 2010 व 2011 की वसीयत का जिक्र करते हुए उन्हें निरस्त कर दिया। अधिवक्ता का कहना है कि नरेंद्र गिरि की एकमात्र आखिरी वसीयत 2020 की है और वही मान्य है। पंच परमेश्वर वसीयत के खिलाफ कोई फैसला लें तो कानूनी तौर पर उसके मान्य होने के संबंध में श्री द्विवेदी ने कहा कि यह जो वसीयत है, वह कानूनी अधिकार ही देती है। क्योंकि मठ का बाइलॉज ऐसा कहता है। महंत जी भी स्वयं अपने गुरु भगवान गिरि से वसीयत के आधार पर ही महंत बने थे तो वो जो मठ के संविधान में है, उसमें वसीयत के आधार पर ही उत्तराधिकारी तय करने का नियम है। उसी नियम से ही बलवीर गिरि उनके उत्तराधिकारी हैं। एडवोकेट ऋषि द्विवेदी का कहना है कि अगर कोई भी उत्तराधिकारी होता है और उसको उसी मृतक के संबंध में किसी कोर्ट ने सजा दे तो उक्त उत्तराधिकारी को फिर कोई अधिकार नहीं रह जाएगा। वसीयत में उन्होंने मठ की समस्त चल-अचल संपत्ति का उत्तराधिकारी बनाया है, जो लगभग 200 करोड़ की है। इसके अलावा बड़े हनुमान मंदिर परिसर की दुकानें अलग अलग लोगों को 29 साल की लीज पर दिया गया है।

खुदकुशी वाले दिन वकील से मिलने को कहा था

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या से कुछ घंटे पूर्व अपने वकील से मिलने की बात कही थी।

नरेंद्र गिरि की वसीयत तैयार करने वाले एडवोकेट ऋषि द्विवेदी ने टीवी चैनलों को बताया कि उस दिन महंत जी ने उन्हें कॉल करके मिलने की बात कही थी। बकौल ऋषि द्विवेदी नरेंद्र गिरि ने दोपहर में कॉल करके उनसे पूछा कि कहां हैं। उन्होंने बताया कि कोर्ट में हैं। इस पर महंत जी ने शाम को फ्री होने पर मिलने की इच्छा व्यक्त की थी लेकिन उससे पहले वह घटना हो गई। एडवोकेट द्विवेदी ने बताया कि महंत जी हमसे वार्ता करते थे और अपनी बातें बताते थे लेकिन आनंद गिरि आदि से क्या विवाद है, इस संबंध में कभी कोई बात नहीं बताई।

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