उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की वेबवसाइट पर अकबर प्रयागराजी लिखे जाने पर आयोग का यू-टर्न

उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने कहा ये किसी शरारती तत्व का काम, साइबर सेल से कराएंगे जांच

उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने अपनी वेबसाइट पर नामचीन साहित्यकारों और शायरों का नाम बदलने के मामले में यू-टर्न ले लिया है। मामला मीडिया में हाई लाइट होने पर आयोग ने अपनी गलती मानने की बजाय अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।

यह किसी शरारती तत्व का काम

अपनी नाकामी छिपाने के लिए आयोग ने कहा है कि अकबर इलाहाबादी का नाम बदलकर अकबर प्रयागराजी करने के मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। यह किसी शरारती तत्व का काम है, जिसने शहर के नामचीन शायरों के नाम के आगे इलाहाबादी हटाकर प्रयागराजी कर दिया है।

साइबर सेल से मामले की कराएंगे जांच

उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के उप सचिव डॉ. शिव जी मालवीय ने 28 दिसंबर को एक विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि इसकी साइबर सेल से शिकायत की जाएगी। साइबर सेल की जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। कि सोशल मीडिया पर यह प्रसारित हो रहा है कि उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की वेबसाइट www.uphesc.org के अबाउट अस कॉलम में अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी किए जाने के कारण अब अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी कहिए।

आयोग ने अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी नहीं लिखा

इस संबंध में कहना है कि आयोग की वेबसाइट पर कुछ शरारती तत्वों द्वारा उक्त भ्रामक सूचना दी गई है। आयोग इसकी निंदा करता है। इस प्रकार की कोई सूचना आयोग द्वारा नहीं लिखी गई है। इसको संशोधन किया जा रहा है। आयोग की वेबसाइट पर शरारती तत्वों द्वारा इस कृत्य की साइबर सेल से जांच कराई जाएगी। इसके बार आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

आयोग की आफिशियल वेबसाइट पर बदल डाला नाम

उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट uphesc.org के “अबाउट अस” कॉलम में अबाउट इलाहाबाद सब कॉलम दे रखा है। इसे क्लिक करने पर एक पेज खुलता है जिसमें एबाउट इलाहाबाद लिखा है। उसपर क्लिक करने पर एक पेज खुलता है जिसमें प्रयागराज का इतिहास लिखा गया है। 462 शब्दों में लिखे गए इतिहास में जहां हिंदी साहित्य का इतिहास लिखा गया है उसमें अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी लिखा गया है। इसके अलावा तेज इलाहाबादी को तेग प्रयागराजी और राशिद इलाहाबादी को राशिद प्रयागराजी लिखा गया है। इस मामले को दैनिक भास्कर द्वारा सबसे पहले प्रकाशित करने के बाद इंटरनेट पर साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने आयोग और योगी सरकार को आड़े हाथों लिया है। इसकी कड़ी आलोचना हो रही है।

अध्यक्ष के कमरे में ताला लगा मिला

दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने जग उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में जाकर अध्यक्ष से बात करने की कोशिश की तो वहां ताला लगा मिला। आयोग में तैनात सुरक्षा गार्ड ने बताया कि 31 तक शीतकालीन अवकाश चल रहा है। अब आयोग एक जनवरी 2022 को खुलेगा। आज आयोग में कोई नहीं है।

Related posts