ऋषि कुमार शुक्ला सीबीआई के नए डायरेक्टर

चैतन्य भारत न्यूज।

1983 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी ऋषि कुमार शुक्ला को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (सीबीआई) का नया निदेशक (डायरेक्टर) बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने उन्हें सीबीआई का मुखिया बनाने का फैसला किया। गौरतलब है कि ऋषि कुमार शुक्ला को कुछ ही दिन पहले मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने डीजीपी पद से हटा दिया था। शुक्ला ने रेस में शामिल 1983, 1984 और 1985 बैच के आईपीएस अफसरों के बीच बाजी मारी है।

सरकार ने आलोक वर्मा को इस पद से हटाने के कुछ सप्ताह बाद यह नियुक्ति की है। उनकी नियुक्ति उच्चस्तरीय चयन समिति की पिछले नौ दिनों में दो बार हुई बैठक के बाद जांच एजेंसी के शीर्ष पद के लिए 70 उम्मीदवारों में से की गई है।

चयन समिति में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल रहे। खड़गे की आपत्ति के बावजूद समिति ने दो-एक से बहुमत से शुक्ला को निदेशक बनाने का फैसला किया। इसी के साथ चयन के आखिरी चरण तक पहुंचने के बावजूद आईपीएस जावीद अहमद, राजीव भटनागर, एपी माहेश्वरी और सुदीप लखटकिया पीछे छूट गए।
बता दें कि हाल ही में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 29 जनवरी को शुक्ला को डीजीपी पद से हटाकर दोबारा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन में भेज दिया था। उनकी जगह वीके सिंह को मध्य प्रदेश का नया डीजीपी बनाया गया था। शिवराज सरकार में डीजीपी बनने से पहले भी वे मप्र पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के चेयरमैन थे।

मूल रूप से मध्य प्रदेश के हैं शुक्ला

ऋषि कुमार शुक्ला मूल रूप से ग्वालियर के लाला बाजार के रहने वाले हैं। ग्वालियर में 23 अगस्त 1960 को जन्मे शुक्ला ने बी. कॉम तक की शिक्षा अर्जित की। वर्ष 1983 में उनका आईपीएस में चयन हो गया। इसके बाद शुक्ला रायपुर में नगर पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रहे। पुलिस अधीक्षक के तौर पर सबसे पहले उनकी पदस्थापना दमोह में 1986 में हुई। इसके बाद वर्ष 1992 से 1996 तक केंद्र सरकार की सेवा में तैनात रहे। वे दमोह, शिवपुरी और मंदसौर जिले के एसपी रहे। इसके अलावा 2009 से 2012 तक एडीजी इंटेलिजेंस भी रह चुके हैं। जुलाई, 2016 से जनवरी, 2019 तक मध्यप्रदेश के डीजीपी थे।

हाल ही में विधानसभा चुनाव के दौरान जब वह स्वास्थ्य कारणों से करीब डेढ़ महीने की लंबी छुट्टी पर चले गए थे तो चुनाव के समय इतनी लंबी छुट्टी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं थीं। उनके इस फैसले के बाद चुनाव आयोग को उनकी जगह 1984 बैच के आईपीएस वीके सिंह को कार्यवाहक डीजीपी बनाना पड़ा था।

ये आईपीएस थे रेस में
सीबीआई का डायरेक्टर बनने की रेस में 1983, 1984 और 1985 बैच के कई प्रमुख आईपीएस अफसरों का नाम चल रहा था। 1983 बैच के अफसरों की बात करें तो गृह मंत्रालय में विशेष सचिव (आतंरिक सुरक्षा) रीना मित्रा, उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह, सीआरपीएफ के महानिदेशक राजीव राय भटनागर का नाम प्रमुख था। वहीं 1984 बैच के कुछ प्रमुख नामों में एनआईए प्रमुख मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के महानिदेशक सुदीप लखटकिया, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के प्रमुख ए.पी. माहेश्वरी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस के निदेशक एस. जावीद अहमद, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक रजनीकांत मिश्रा और भारत-तिब्ब्त सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के प्रमुख एस.एस. देसवाल शामिल रहे।

खड़गे ने जताई असहमति
शुक्ला को सीबीआई का निदेशक नियुक्त करने के बाद चयन समिति में सदस्य के रूप में शामिल कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को अपना असहमति पत्र भेजा है। असहमति पत्र में उन्होंने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। बता दें कि सीबीआई प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति की घोषणा के बाद सरकार और विपक्षी पार्टी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

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