एमएनएनआईटी की तकनीक से बना हर्बल कैप्सूल बाजार में मिलेगा

एमएनएनआईटी के वैज्ञानिकों ने हर्बल दवाओं के लिए एंटी बायो फिल्म और एंटी कोरम टेक्नोलॉजी का इजाद किया था। इसके बाद इस टेक्नोलॉजों का संस्थान ने पेटेंट भी कराया। गुरुवार को संस्थान ने समझौते के तहत वाइटान फार्मास्यूटिकल्स एंड एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया। इस टेक्नोलॉजी से बनी हर्बल दवाएं लोगों को जल्द बाजारों में मिलेगी, जो डायरिया और डिसेंट्री को ठीक करने में काम आएगी।

निदेशक प्रो. राजीव त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान के जैव प्रौद्योगिकी विभाग कि इस टेक्नोलॉजी के अंतर्गत कंपनी हर्बल कैप्सूल का निर्माण करेगी, जो पुराने एवं जटिल संक्रामक रोगों के साथ ही डायरिया और डिसेंट्री को दूर करने में कारगर साबित होगी। संस्थान के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विष्णु अग्रवाल ने बताया कि इस टेक्नोलॉजी में प्रत्येक स्तर पर वर्षों प्रयोगशाला में शोध के बाद यह पाया गया कि कुछ हर्बल फार्माल्यूशन से शारीरिक संक्रमण जोकि बायोफिल्म एवं कोरम सेंसिंग से उत्पन्न विशेष प्रकार के सिग्नल को प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है।

एमओयू के कार्यक्रम रजिस्ट्रार डॉ. सर्वेश कुमार तिवारी, प्रो. गीतिका, प्रो. शिवेश शर्मा, प्रो. एचएन कर, मनीषा यादव, देवेंद्र सिंह और कंपनी के सीईओ अखिलेश तिवारी मौजूद रहे।

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