कड़ाके की ठंड में, आस्था की डुबकी के साथ शुरू हुआ कुंभ

प्रयागराज (चैतन्य भारत न्यूज)। मकर संक्रांति पर शाही स्नान के साथ ही प्रयागराज में कुंभ का श्रीगणेश हो गया है। कड़ाके की ठंड के बावजूद अलग-अलग अखाड़ों के साधु गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। मंगलवार को सुबह पांच बजे से शुरू स्नान पूरे दिन जारी रहेगा। सुबह सबसे पहले करीब छह बजे महानिर्वाणी के साधु-संत पूरे लाव-लश्कर के साथ शाही स्नान के लिए संगम तट पर पहुंचे।

इसके साथ ही अखाड़ों के स्नान का क्रम शुरू हुआ। सभी अखाड़ों को बारी-बारी से स्नान के लिए 30 मिनट से 45 मिनट तक का समय दिया गया है। साधु-संतों के साथ आम श्रद्धालु भी संगम सहित अलग-अलग घाटों पर आधी रात से स्नान कर रहे हैं। कड़ी सुरक्षा के बीच स्नान और पूजा पाठ का क्रम जारी है। पारा 10 डिग्री सेल्सियस से भी कम है लेकिन लोगों की धार्मिक आस्था का जोश कम नहीं है।
पूरे धूमधाम से शोभा यात्रा निकालते हुए निरंजनी और आनंद अखाड़े के साधु संतों ने संगम तट पर शाही स्नान किया। केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति को निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया है। वह भी इस पावन पर्व पर कुंभ के शंखनाद की साक्षी बनीं।

ये हैं स्नान की छह प्रमुख तिथियांः
मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा, महाशिवरात्रि। पौष पूर्णिमा 21 जनवरी को होगी इसके बाद ही माघ महीने की शुरुआत होती है। कुंभ मेले में पांचवां स्नान 19 फरवरी को माघी पूर्णिमा के दिन होगा। कहते हैं कि इस दिन सभी हिंदू देवता स्वर्ग से संगम आए थे। इसी दिन कल्पवास व्रतधारी स्नान कर अपना व्रत पूर्ण करते हैं। इस दिन बहस्पति गुरु की भी पूजा की जाती है। कुंभ मेले का आखिरी स्नान महाशिवरात्रि (4 मार्च) को होगा।

ये रहा खासः
प्रयागराज कुंभ के पहले शाही स्नान में जूना अखाड़े के साथ किन्नर अखाड़े ने भी डुबकी लगाई। बता दें कि जूना और किन्नर अखाड़े का विलय चर्चा का विषय बनी हुई थी। तब किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने विलय की बात से इंकार करते हुए कहा था कि, साथ चलेंगे, साथ रहेंगे लेकिन विलय नहीं करेंगे। आज जूना के साथ किन्नर अखाड़े ने डुबकी लगाकर एक साथ होने का प्रमाण दे दिया।

आज स्नान करने वाले सभी 13 अखाड़ों को तीन वर्गों में बांटा गया है। संन्यासी, बैरागी और उदासीन। सबसे पहले संन्यासी अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे, इसके बाद बैरागी और अंत में उदासीन के अंतर्गत आने वाले संत शाही स्नान करेंगे।

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