ट्रेड क्रेडिट पॉलिसी में संशोधन, आयात के लिए पूंजी जुटाना आसान  

टीम चैतन्य भारत

रिजर्व बैंक ने वैसे आयातकों को बड़ी राहत दी है, जो विदेशी बाजारों से पूंजी जुटाकर आयात करते हैं। अब वे कम लागत पर ज्यादा पूंजी जुटा सकेंगे।

भारतीय रिजर्व बैंक ने ट्रेड क्रेडिट पॉलिसी में बदलाव किया है। ऑटोमेटिक रूट से पूंजीगत और गैर-पूंजीगत सामान आयात करने के लिए विदेशी संस्थाओं से पंजी जुटाने की सीमा बढ़ाकर 15 करोड़ यूएस डॉलर कर दी गई है। इसका मतलब यह हुआ कि आयातक ऑटोमेटिक रूट से विदेशी बाजारों और वित्तीय संस्थानों से इस सीमा तक पूंजी जुटा सकेंगे।

आरबीआई ने ट्रेड क्रेडिट पॉलिसी (टीपीसी) की संशोधित रूपरेखा की घोषणा करते हुए यह भी कहा कि विदेशी कर्जों के लिए सभी समावेशी लागत ‘लोन टू बेंचमार्क रेट घटाकर 250 आधार अंक (2.5 प्रतिशत) कर दिया गया है, जो पहले 3.5 प्रतिशत थी।

रिजर्व बैंक की तरफ से जारी एक सर्कुलर में कहा गया है कि टीपीसी के लिए इसकी संशोधित रूपरेखा के मुताबिक ऑयल एंड गैस रिफाइनिंग, विमानन या शिपिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियां ट्रेड क्रेडिट के तहत ऑटोमेटिक रूट से 15 करोड़ डॉलर की पूंजी जुटा सकती हैं। अन्य कंपनियों के लिए यह सीमा 5 करोड़ डॉलर तय की गई है। पहले सभी कंपनियों के लिए यह सीमा महज 2 करोड़ डॉलर थी। इसके अलावा विदेशी कर्ज के लिए समग्र लागत की बेंचमार्क रेट घटाकर 250 आधार अंक (2.5 प्रतिशत) कर दिया गया है, जो पहले 3.5 प्रतिशत थी।

ट्रेड क्रेडिट अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ता, बैंक, वित्तीय संस्थान और अनुमति प्राप्त अन्य उधारदाताओं की तरफ से पूंजीगत और गैर-पूंजीगत सामान के आयात के पूंजी की जरूरतें पूरी करने का एक तरीका है। इस तरह की पूंजी, विदेशी करेंसी के साथ-साथ रुपए में भी जुटाई जा सकती है। क्रेडिट की समग्र लागत में ब्याज दर, सभी खर्चे, शुल्क, चार्जेज और गारंटी फीस शामिल होती हैं। लेकिन, भारतीय रुपए में देय टैक्स इसका हिस्सा नहीं होता। रिजर्व बैंक की तरफ से किए गए ये संशोधन जल्द अमल में आएंगे।

 

Related posts