नवरात्रि के दूसरे दिन होती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, विद्यार्थी जरूर करें इस मंत्र का जाप

नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। ब्रह्मचारिणी देवी के हाथों मे अक्षमाला और कमंडल होता है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है।

टीम चैतन्य भारत

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। ब्रह्मचारिणी देवी के हाथों मे अक्षमाला और कमंडल होता है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी और इसलिए वह तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से प्रसिद्ध हैं। ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा करना विद्यार्थियों और तपस्वियों के लिए बेहद शुभ और फलदायी होती है। कहा जाता है कि, जिस भी व्यक्ति का चन्द्रमा कमजोर हो, उन्हें मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करना चाहिए।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि?

  •  मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय हमेशा पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।
  • मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग के फूल अथवा वस्तुएं जैसे- मिश्री, शक्कर या पंचामृत अर्पित करें।
  • मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करते समय ज्ञान और वैराग्य के मंत्र का जाप करें।
  • मां ब्रह्मचारिणी के लिए सबसे उत्तम जाप “ॐ ऐं नमः” माना जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते वक्त हाथों में एक सफेद रंग का फूल लेकर देवी का ध्यान करें और फिर इस मंत्र का उच्चारण करें-

ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।

जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥

गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।

धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥

परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।

पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

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