प्रयागराज के संगम तट पर 14 जनवरी से शुरू हो रहे माघ मेले में देश भर से पहुंच रहे कल्पवासी

प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित होने वाले माघ मेला का श्रीगणेश कल यानी 14 जनवरी से हो रहा है। एक तरफ कोरोना संक्रमण का कहर तो दूसरी ओर मां गंगा के प्रति अटूट आस्था। तंबूओं की नगरी में आयोजित हो रहे इस माघ मेले के प्रति लोगों में आस्था ऐसी कि न तो कोराेना का कोई भय है न तो ठंड का डर, तभी तो देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का रेला संगम तीरे जुटने लगा है। ट्रैक्टर, पिकअप व अन्य अलग-अलग साधनों से कल्पवासी इस पवित्र स्थल पर कल्पवास करने आने लगे हैं।

इन कल्पवासियों में तमाम ऐसे भी श्रद्धालु शामिल हैं जिनकी उम्र 80 से 90 साल है यानी जिंदगी के इस पड़ाव में जब उन्हें घरों में रहना चाहिए तो भी वह गंगा की गोद में कल्पवास करने के लिए आ रहे हैं। 52 साल पुराना इनका संगम से नाता कोरोना पर भारी है।

MP से कल्पवास करने आए 90 बरस के भुंवर लाल

गंगा, यमुना और मां सरस्वती से ऐसी आस्था जुड़ी है कि 90 बरस के भुंवर लाल मध्यप्रदेश के रीवा से संगमनगरी पहुंच गए हैं। ठंड और कोरोना को मात देते हुए वह पिकअप के ऊपरी भाग में बैठकर संगम की तरफ बढ़ रहे थे। परिवार के अन्य सदस्य इन्हें संगम तट पर पहुंचाने के लिए साथ आए थे। दैनिक भास्कर ने जब उनसे बातचीत की तो उनकी आवाज और बुलंद हो गई। बोले, मैं हर साल पत्नी और भाई के साथ यहां कल्पवास करने के लिए आते हैं और प्रतिदिन सुबह पांच बजे गंगा स्नान करने का अवसर नहीं छोड़ता।

20 साल से कल्पवासी बनकर आते हैं जगदीश

जगदीश प्रसाद तिवारी फूलपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यपक है। वह पिछले 20 साल से अपनी पत्नी के साथ कल्पवासी बनकर मां गंगा की गोद में आते हैं। वह कहते हैं कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज उन्होंने लगवा ली है, गंगा मईया के प्रति ऐसा अटूट संबंध है कि यहां हर साल माघ मेले में कल्पवासी बनकर आते हैं और प्रतिदिन यहां स्नान ध्यान करते हैं। उनकी पत्नी कहती हैं कि वह चारों धाम की यात्रा कर चुकी हैं लेकिन माघ मेला और कुंभ के दौरान इस पवित्र स्थान पर आकर जो संतुष्टि होती है वह बयां नहीं किया जा सकता है। कहती हैं जब तक मां गंगा हमें यहां बुलाएंगी ऐसे ही वह आती रहेंगी।

घर से लाते हैं पूरी गृहस्थी का सामान

संगम तीरे कल्पवास करने आने वाले कल्पवासी यहां एक माह तक रहते हैं। सरकार इस मेले के नाम पर भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो लेकिन यह कल्पवासी खुद के भरोसे यहां आते हैं। पूरे कल्पवास के दौरान यह पूरी गृहस्थी का सामान अपने साथ यहां लाते हैं। बर्तन, राशन, चूल्हा चौकी यहां तक कि तुलसी व केले का पौधा भी साथ लाते हैं।

यह हैं प्रमुख स्नान पर्व

मकर संक्रांति – 14 जनवरी – शुक्रवार

पौष पूर्णिमा – 17 जनवरी – सोमवार

मौनी अमावस्या – एक फरवरी – मंगलवार

बसंत पंचमी – पांच फरवरी – शनिवार

माघी पूर्णिमा – 16 फरवरी – बुधवार

महाशिवरात्रि – एक मार्च – मंगलवार

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