प्रयागराज में पुलिसकर्मियों ने जाना कैसे होती है सोशल मीडिया से साइबर ठगी

सभी थानों में साइबर हेल्प डेस्क बनाने से पूर्व पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम बुधवार से शुरू हो गया। डीजीपी मुख्यालय की ओर से पुलिसकर्मियों को पहले दिन ऑनलाइन साइबर की एबीसीडी बताई गई। सोशल मीडिया के जरिए होने वाले साइबर अपराध के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।

साइबर अपराध की रोकथाम और विवेचना में आ रही समस्याओं को उजगार किया। इस क्रम में डीजीपी की ओर से लोगों की मदद के लिए सभी थानों पर साइबर हेल्प डेस्क बनाने का निर्देश जारी हुआ है। हेल्प डेस्क के लिए सभी थानों में पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बुधवार को रेंज के सभी थानों के चार दरोगा और चार सिपाहियों को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई। इसमें मुख्य काम साइबर थाने का रहा। साइबर थाना प्रभारी राजीव तिवारी ने बताया कि डीजीपी मुख्यालय की ओर से पुलिस अफसरों और साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध की कार्यप्रणाली को बताया।

पहले दिन पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया जैसे ओएलएक्स पर सेलिंग के नाम से होने वाले ठगी के बारे में जानकारी दी गई। पुलिसकर्मियों को बताया गया कि जैसे किसी ने अपनी बाइक बेचने के लिए ओएलएक्स पर फोटो अपलोड किया। प्रमाण के लिए आरसी पेपर शेयर करता है। साइबर शातिर उस फोटो और पेपर की कॉपी करके दूसरे नाम से बाइक बेचने के लिए फोटो अपलोड करते हैं। उसमें मोबाइल नंबर बदल देते हैं। इसके बाद बाइक बेचने के नाम पर ऑनलाइन ठगी करते हैं। इसी तरह से पुलिसकर्मियों को फेसबुक से होने वाले फ्राड, दूसरे के नाम पर फेक आईडी बनाना और रुपये मांगने के केस के साथ ठगी के तरीकों को बताया। ओटीपी के बारे में भी जानकारी दी कि कैसे साइबर शातिर कॉल करके जानकारी हासिल करते हैं। दूसरे चरण में पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधियों को ट्रैप करना सिखाया जाएगा। यह प्रशिक्षण 30 सितंबर तक चलेगा।

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