प्रयागराज हत्याकांड : 17 लोगों की डीएनए जांच, 30 के फिंगर प्रिंट

 प्रयागराज के फाफामऊ थाना क्षेत्र में दलित किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म कर पूरे परिवार (चार लोगों) को मार डालने के मामले में भले ही पुलिस ने तीन आरोपितों को कुछ दिन के अंतराल में जेल भेज दिया है। हालांकि हकीकत यही है कि पुलिस अभी भी वहीं खड़ी है, जहां पहले दिन थी। अभी तक पुलिस को ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे वह यह साबित कर सके कि जेल भेजे गए तीनों आरोपितों में किसने इस क्रूरता भरे हत्याकांड को अंजाम दिया था।

25 नवंबर को घर के मुखिया, उसकी पत्नी, पुत्री और पुत्र के शव घर में मिले थे। सभी के सिर में धारदार हथियार से प्रहार किया गया था। घटनास्थल से पुलिस ने रक्तरंजित कुल्हाड़ी बरामद की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किशोरी से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। मृतकों के स्वजनों ने गांव के ही 11 लोगों के खिलाफ हत्या, सामूहिक दुष्कर्म समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। 25 नवंबर से लेकर छह दिसंबर तक पुलिस मामले के राजफाश को लेकर 17 लोगों की डीएनए जांच करा चुकी है। 30 लोगों के फिंगर प्रिंट ले चुकी है।

– 130 से अधिक लोगों से हो चुकी है पूछताछ

– 07 टीमें राजफाश में लगाई गईं हैं

– 03 दूसरे राज्यों तक पहुंची पुलिस

पुलिस 130 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। यही नहीं, उप्र के कई जनपदों के साथ ही दिल्ली, हरियाणा और पुणे की खाक छान चुकी है। पुलिस की स्थानीय चार टीमों के साथ ही एसओजी, सविलांस टीम भी लगी है। एसटीएफ भी तहकीकात कर रही है। अभी तक तीन को गिरफ्तार किया जा चुका है।

28 नवंबर को थरवई के कोरसंड निवासी पवन कुमार सरोज और छह दिसंबर को सोरांव के सरायभोगी गांव के शशि पटेल और उसके मौसेरे भाई रजनीश पटेल निवासी लेहरा थाना फाफामऊ को पकड़ा गया था। इन सभी के खिलाफ पुलिस के पास कोई पुख्ता सुबूत नहीं है। साक्ष्य के रूप में मात्र मोबाइल की चैटिंग है। इसी को पुलिस ने आधार बनाते हुए हत्याकांड में संलिप्तता नजर आना बताया है। जबकि मृतकों के स्वजनों द्वारा सबसे पहले जो एफआइआर दर्ज कराई गई थी, उसमें गांव के ही 11 लोग शामिल थे। इसमें चार को पुलिस पुराने एक मामले में जेल भेज चुकी है, जबकि सात के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक तौर पर पुलिस नामजद किए गए 11 आरोपितों को हत्याकांड का आरोपित नहीं मान रही है।

हत्याकांड में नामजद किए गए 11 आरोपितों में दो कान्हा और अशोक को पुलिस ने दिल्ली से पकड़ा था। दोनों को बेली अस्पताल लाया गया, जहां डीएनए जांच के लिए इनके नमूने लिए गए। इसके बाद पुलिस वापस दोनों को लेकर फाफामऊ चली गई।

चार लोगों की हत्या की गुत्थी को सुलझाने के लिए क्राइम ब्रांच की टीम मृतकों के गांव पहुंची। कई लोगों से यहां पूछताछ की गई। पुलिस को संदेह है कि इस हत्याकांड की गुत्थी गांव से ही सुलझेगी।

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