फिर बढ़ने लगी महंगाई, प्रभावित होगी अर्थव्यवस्था 

टीम चैतन्य भारत

फरवरी में खुदरा कीमतों के हिसाब से महंगाई बढ़ी है। रिजर्व बैंक का अनुमान है कि आगे चलकर महंगाई और बढ़ेगी। यदि वाकई ऐसा हुआ तो अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक असर हो सकता है।

फिर बढ़ने लगी महंगाई

देश में महंगाई दर एक बार फिर बढ़ने लगी है। अर्थव्यवस्था और बाजार पर इसका असर होता है। दरअसल, महंगाई सामान और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी मापने का एक तरीका है, जो क्रमिक रूप से डॉलर की क्रयशक्ति कम करती है। इसका असर इस तरीके से देखा जा सकता है कि जब महंगाई बढ़ती है तो उपभोक्ता कम मात्रा में सामान और सेवाएं खरीदते हैं, कंपनियों के लिए इनपुट लागत बढ़ जाती है और उनकी आय व मुनाफा कम हो जाता है। नतीजतन अर्थव्यवस्था तब तक सुस्त होने लगती है, जब तक कीमतों के मामले में स्थिरता नहीं आ जाती।

फरवरी में खुदरा कीमतों के हिसाब से महंगाई दर (सीपीआई) 2.57 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जो जनवरी में 2.05 प्रतिशत थी। यह ईंधन और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी का नतीजा है। फिर भी राहत की बात यह रही कि यह लगातार 7वां महीना रहा, जब महंगाई दर मध्यम अवधि के लिए रिजर्व बैंक के लक्ष्य 4 प्रतिशत से कम रही।

रिजर्व बैंक हर दो महीने में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक बुलाता है। इस समिति की छठी बैठक में आरबीआई ने मौद्रिक नीति के मामले में अपना रुख कैलिब्रेटेड टाइटनिंग से बदलकर न्यूट्रल कर लिया और रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2018-19 की आखिरी तिमाही के लिए महंगाई का स्तर संशोधित करके 2.8 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में महंगाई दर 3.2-3.4 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 3.9 प्रतिशत रहेगी।

महंगाई बढ़ने का नतीजा

जनवरी में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 1.7 प्रतिशत रह गई, जो दिसंबर, 2018 में 2.4 प्रतिशत थी। यही नहीं, जनवरी में मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स भी 1.3 प्रतिशत पर आ गया, जो दिसंबर 2018 में 2.7 प्रतिशत था। बावजूद इसके कैलेंडर वर्ष 2019 के पहले महीने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के दायरे में आने वाले कुल 23 उद्योगों में से 11 सेक्टरों ने रिकॉर्ड ग्रोथ हासिल की।

 

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