बलवीर गिरि को मिली नरेंद्र गिरि की गद्दी

13 अखाड़ों के महंतों की मौजूदगी में पट्टाभिषेक

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे नरेंद्र गिरि की वसीयत के अनुसार मंगलवार को बलवीर गिरि को उनकी गद्दी सौंप दी गई। सनातन धर्म के वैभव, शक्ति और समर्पण के केंद्र श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी में 13 अखाड़ों के महात्माओं की मौजूदगी में श्रीनिरंजनी अखाड़ा के उपमहंत बलवीर गिरि का महंत के रूप में पट्टाभिषेक किया गया। बलवीर गिरि ने नरेंद्र गिरि की समाधि में माथा टेककर पूजन किया। 

श्रीमहंत विचारानंद संस्कृत महाविद्यालय में सुबह 11 बजे से श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत हुई। 13 अखाड़ों सहित प्रमुख महात्माओं ने नरेंद्र गिरि को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रीनिरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि की अध्यक्षता में कार्यक्रम किया गया। श्रीनिरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि व पंचपरमेश्वर ने पहली चादर ओढ़ाई। तत्पश्चात बलवीर गिरि ने नरेंद्र गिरि की समाधि पर मत्था टेका।

इस अवसर पर निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर केलाशानंद, सचिव रविन्द्र पुरी, आनंद अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर बालकानंद, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, महंत, सचिव समेत 13वों अखाड़े के प्रतिनिधि की उपस्थिति में पट्टाभिषेक हुआ। निर्मल अखाड़ा के अध्यक्ष ज्ञानदेव, अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि  गिरि, विहिप नेता दिनेश जी, शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी, सहित प्रमुख  महात्मा मौजूद थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य ने बलबीर गिरि के लिए महंत चादर भिजवाई। निरजंनी अखाड़ा के सचिव रविन्द्रपुरी ने आभार व्यक्त किया।

निरंजनी अखाड़े ने जारी किया बयान

बलवीर के महंत बनने के बाद निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि की मौत को ज्यादा तूल न दिया जाए। अभी तक की जांच में यह साबित हो गया है कि नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की है। अब नए महंत बलवीर पुरी महाराज हैं तो उन्हें अपना समर्थन और आशीर्वाद दें। उन्होंने कहा कि आज से यह मठ बलवीर पुरी के हवाले है। मुझे उम्मीद है कि वे मठ की गरिमा और वैभव को बनाए रखेंगे।

बलवीर ‘पुरी’ से हुए ‘गिरि’

बलवीर शुरू से ही अपने नाम में ‘पुरी’ लगाते आ रहे थे। लेकिन अब श्री बाघंबरी गद्दी के नए महंत बनने के बाद उनके नाम के साथ ‘गिरि’ जुड़ गया है। दरअसल, श्री बाघंबरी गद्दी मठ की स्थापना 1982 में श्री निरंजनी अखाड़े के महात्मा बाबा बाल किशन गिरि ने की थी। यह गिरि नागा संन्यासी की गद्दी मानी जाती है। इसी वजह से अब ​​​​​महंत बनने के बाद ​​बलवीर के नाम में ‘गिरि’ टाइटल जुड़ गया है।

पंच परमेश्वर की बैठक में तय हुआ था नाम

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की इच्छा थी कि उनकी षोडशी के दिन यानी आज बलवीर पुरी को बाघंबरी गद्दी मठ का नया महंत बनाया जाए। इसी वजह से उनकी मौत के ठीक 10 दिन बाद बिल्केश्वर महादेव मंदिर के महंत बलवीर पुरी को बाघंबरी गद्दी का महंत घोषित किया गया। यह घोषणा हरिद्वार में 30 अगस्त को हुई पंच परमेश्वर की बैठक में की गई थी। तय किया गया था कि 5 अक्टूबर को नरेंद्र गिरि की षोडशी के दिन उनकी चादर विधि होगी।

श्री निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर बने साक्षी

अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज और सचिव रवींद्र पुरी की मौजूदगी में चादर विधि कार्यक्रम हुआ। श्री निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी ने बताया कि जब किसी अखाड़े का नया उत्तराधिकारी घोषित किया जाता है, तो उसे चादर विधि से महंत बनाया जाता है। हमारे अखाड़ों की यही परंपरा रही है। जिस दिन अखाड़े के महंत की षोडशी होती है, उसी दिन नए महंत की चादर विधि भी करते हैं।

कौन हैं बलवीर पुरी

-बलवीर पुरी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के करीबी शिष्यों में शामिल रहे।
-1998 में वह निरंजनी अखाड़े के संपर्क में आए।
-नरेंद्र गिरि से उनका संपर्क 2001 में हुआ। उस वक्त नरेंद्र गिरि निरंजनी अखाड़े के कारोबारी महंत थे।
-इसके बाद बलवीर पुरी ने अखाड़े में नरेंद्र गिरि से दीक्षा ग्रहण की और उनके शिष्य हो गए।
-धीरे-धीरे नरेंद्र गिरि के घनिष्ठ और विश्वासपात्र सहयोगी के तौर पर पहचान बनी।
-नरेंद्र गिरि जब निरंजनी अखाड़े की ओर से बाघंबरी गद्दी के पीठाधीश्वर बन कर प्रयागराज आए, तो बलवीर भी उनके साथ यहां आ गए।
-सहयोगी के तौर पर नरेंद्र गिरि ने बलवीर को जो भी जिम्मेदारी सौंपी, उसे उन्होंने पूरी कर्मठता और निष्ठा से निभाया।
-नरेंद्र गिरि उन पर पूरी तरह निर्भर थे और विश्वास करते थे। कुंभ और बड़े पर्व के दौरान अखाड़े व मठ की ओर से खर्च को आने वाले लाखों रुपए बलवीर के पास ही रखे जाते थे।
-ये रुपए बलवीर की देख-रेख में खर्च किए जाते थे। इस साल हुए हरिद्वार कुंभ के दौरान भी उन्होंने इस भूमिका को बखूबी निभाया।
-आनंद गिरि से विवाद और बढ़ती दूरी ने बलवीर पुरी को नरेंद्र गिरि का और करीबी बना दिया।

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