महंत की मौत का सुराग वसीयत में ढूंढेगी CBI

वसीयत के किरदार रडार पर, बलवीर क्यों छोड़ गए थे मठ? आनंद का नाम क्यों हटाया गया

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व श्री मठ बाघंबरी गद्दी के महंत रहे नरेंद्र गिरि की मौत में CBI की जांच अब वसीयत पर आकर टिक गई है। वसीयत के दोनों किरदारों महंत बलवीर गिरि और आनंद गिरि से एक बार फिर से पूछताछ की तैयारी है। सीबीआई इस सवाल की तह तक जाने की कोशिश करेगी कि आखिर तीन बार वसीयत क्यों बदली गई?

आखिर क्यों उत्तराधिकारी बदला, जानेगी सीबीआई
सीबीआई नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड मामले की जांच कर रही है। सीबीआई यह जानना चाहती है कि नरेंद्र गिरि ने एक दशक के भीतर आखिर तीन बार वसीयत क्यों बदली? सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहली वसीयत में बलवीर पुरी को, दूसरी वसीयत में आनंद गिरी को व तीसरी और अंतिम वसीयत में बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी क्यों बनाया? बार-बार वसीयत क्यों बदली?

4 जून 2020 को निरस्त की थी दोनों वसीयत
बाघंबरी गद्दी मठ के उत्तराधिकार को लेकर महंत नरेंद्र गिरि ने तीन बार वसीयत बनाई थी। वकील ऋषिशंकर द्विवेदी ने दैनिक भास्कर को बताया कि आनंद गिरि से बढ़ती दूरियों की वजह से चार जून 2020 को उन्होंने अपनी पूर्व की दोनों वसीयतों को निरस्त कराते हुए तीसरी रजिस्टर्ड वसीयत फिर तैयार कराई। इसमें बलवीर गिरि को दोबारा बाघंबरी मठ का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था।

दूसरी वसीयत में आनंद गिरी उत्तराधिकारी
पिछले एक दशक के दौरान महंत नरेंद्र गिरि ने अपने उत्तराधिकारी को लेकर तीन वसीयतें बनवाईं। पहली बार बाघंबरी गद्दी मठ के महंत ने 2010 में उत्तराधिकार को लेकर वसीयत की, जिसमें उन्होंने शिष्य बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया। इसके बाद वर्ष 2011 में उन्होंने दूसरी वसीयत तैयार करवाई, जिसमें अपने शिष्य स्वामी आनंद गिरि को उन्होंने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। इससे नाराज बलवीर मठ छोड़कर चले गए थे। 29 अगस्त 2011 को महंत ने अपनी दूसरी वसीयत में आनंद गिरि को अपना उत्तरधिकारी बनाया था।

वसीयत पर गंभीर क्यों हैं सीबीआई?
महंत नरेंद्र गिरि से जुड़े बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े के पास मौजूदा समय एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। इस संपत्ति पर वसीयत के अनुसार अब बलवीर गिरि का एक तरह से दबदबा रहेगा। प्रयागराज के अलावा, मेजा, करछना, झूंसी व कौशांबी, मध्यप्रदेश, हरिद्वार और दिल्ली समेत अन्य राज्यों में महंत नरेंद्र गिरि के अधिपत्य वाले मठ, मंदिर और जमीन हैं। यही वजह है कि महंत नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इन सभी अनसुलझे सवालों को सुलझाने के लिए सीबीआई पिछले एक माह से प्रयास कर रही है। साथ ही वसीयत में बार-बार उत्तराधिकारी घोषित करने पर भी सवाल का जवाब खोज रही है। आज सभी संबंधित लोगों से सीबीआई पूछताछ कर सकती है।

इन 6 सवालों के जवाब तलाशेगी CBI

  1. क्या नरेंद्र गिरि ने उत्तराधिकारी बदलने से पहले साधु-संतों से चर्चा की थी?
  2. किसी के दबाव में तो उन्होंने वसीयत नहीं बदली?
  3. पहली बार बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया था फिर आनंद गिरि को क्यों बनाया?
  4. बलवीर गिरि ने ऐसा क्या किया कि नरेंद्र गिरि ने पहली वसीयत से उनका नाम हटा दिया?
  5. दूसरी बार आनंद गिरि को उत्तराधिकारी बनाया तो फिर उनका नाम हटाकर बलवीरपुरी को उत्तराधिकारी क्यों बनाया?
  6. आखिर आनंद गिरि ने ऐसा क्या किया जिससे नरेंद्र गिरि नाराज हो गए?

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