माघ मेले में आफत, गंगा में उफान बढ़ने से 40 संस्थाओं को टेंट खाली करने का निर्देश

माघ मेले का पहला स्नान करीब आते ही परेशानी बढ़ गई है। आमतौर पर जनवरी में 75 से 76 मीटर के बीच रहने वाली गंगा का जलस्तर 77 मीटर पहुंचने से मेला प्रशासन में खलबली मच गई। महज तीन दिनों में 20 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा तो प्राधिकरण ने गंगदीप पर बसी 40 संस्थाओं को सामान समेटने का निर्देश दे दिया। इन संस्थाओं को अब दूसरी जगह पर जमीन दी जाएगी।

माघ मेले का पहला स्नान महज एक दिन बाद है और अब संस्थाओं को हटाना व दूसरी जगह जमीन देना प्राधिकरण के काम को बढ़ा रहा है। कुछ दिन पहले जब गंगा का जलस्तर स्थिर हुआ तो प्रशासन को राहत हुई थी। पांटून पुल संख्या चार के पास गंगा के बीच टापू बन गया था। ऐसे में यहां पर 40 संस्थाओं को जमीन दी गई थी। यह वो संस्थाएं थीं जो रेलवे पुल के कारण दूसरी जगह बसायी जानी थी। गंगदीप मिलने से संस्थाओं को राहत हो गई थी, क्योंकि उन्हें गंगा के बीच जमीन मिल गई और प्रशासन को भी विवाद से मुक्ति मिली थी। लेकिन पिछले तीन-चार दिनों से जल प्रवाह में फिर तेजी दिखी। बुधवार को कटान बढ़ने से स्थिति खतरनाक लगने लगी। अफसरों ने जलस्तर देख तो 77 मीटर पहुंच गया था, जो महज तीन दिनों में 20 सेंटीमीटर तक अधिक हो गया था। ऐसे में जल प्रवाह और तेज हो सकता है। मेलाधिकारी शेष मणि पांडेय और एसपी मेला ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और फिर गंगदीप की 40 संस्थाओं को दूसरी जगह पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। मेलाधिकारी शेष मणि पांडेय ने बताया कि जलस्तर बढ़ने के कारण फिलहाल गंगदीप की संस्थाओं को शिफ्ट किया जा रहा है।

मकर संक्रांति का पहला स्नान पर्व 14 और 15 जनवरी को मनाया जाएगा। माघ मेले के लिए कल्पवासियों का प्रयागराज आगमन भी हो गया है। स्नान के लिए परेशानी न हो इसके लिए घाट तैयार किया जा रहा है। बुधवार को किला घाट से लेकर रामघाट तक बोरियां लगाकर घाट तैयार करने का काम कर लिया गया। वहीं काली मार्ग पर गंगापार में बालू को पाटा जा रहा था। यहां पर भी देर रात तक घाट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। अफसरों का कहना है कि कल्पवासियों के आगमन के साथ ही स्नान शुरू हो जाएगा। ऐसे में परेशानी न हो, इसलिए सभी घाट रात तक तैयार कर लिए जाएंगे।

Related posts