यूपी से लेकर राजस्थान, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से जुड़ा आनंद गिरि का कनेक्शन

महंत नरेंद्र गिरि के कभी सबसे करीबी शिष्य रहे योग गुरु आनंद गिरि नैनी जेल में बंद हैं। वैसे तो उनका कई देशों से रिश्ता है। उनके तमाम अनुयायी हैं लेकिन महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद उनके अपनों ने भी दूरी बना ली है। जेल जाने के बाद कुछ ऐसे लोग उनसे मिलने पहुंचे हैं जिनके बारे में मठ के लोगों को भी जानकारी नहीं है। उनका यूपी से लेकर चार राज्यों का कनेक्शन सामने आया है। इन सभी गतिविधियों पर सीबीआई की नजर बनी हुई है।

आनंद गिरि का असली का नाम अशोक कुमार चोटिया है। वह राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बाह्मणों की सरेरी गांव के रहने वाले हैं। राजस्थान से संगम नगरी पहुंचने के बाद उन्हें एक नई पहचान मिली। बड़े हनुमान मंदिर का महंत बनने के बाद आनंद गिरि ने खुद को योग गुरु के रूप में पेश किया। इस बीच जब महंत नरेंद्र गिरि से उनकी दूरी बन गई तो उन्हें प्रयागराज छोड़ना पड़ा। आनंद गिरि ने उत्तराखंड में शरण ली। हरिद्वार स्थित एक आश्रम में रहने लगे। महंत की मौत के बाद उन्हें हरिद्वार से पकड़कर प्रयागराज लाया गया। अब वह जेल में बंद है। बताया जा रहा है कि नैनी जेल में वकीलों के अलावा प्रयाग नगरी से कोई मिलने नहीं गया। दो लोग उनके दोस्त बनकर जेल पहुंचे थे। दोनों मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। अब यूपी, राजस्थान, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश का कनेक्शन का सीबीआई पता लगा रही है।

आशीष गिरि की मौत में मुकदमा दर्ज करने की मांग

अधिवक्ता विजय द्विवेदी ने निरंजनी अखाड़े के सचिव आशीष गिरि की मौत के मामले में मुकदमा दर्ज कराने के लिए सोमवार को डीआईजी को शिकायती पत्र दिया। उन्होंने इस प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमत्री समेत अन्य अफसरों को शिकायती पत्र भेजा है।

विजय द्विवेदी ने बताया कि 17 नवंबर 2019 को निरजंनी अखाड़ा के आश्रम में सचिव आशीष गिरि की गोली लगने से मौत हो गई थी। उस वक्त आत्महत्या का जो भी कारण बताया गया, सभी निराधार था। वारदात के बाद कई अधिवक्ताओं ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की थी। सीबीआई जांच के लिए भी प्रार्थना पत्र दिया था लेकिन उस वक्त कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस केस की किसी वरिष्ठ पुलिस अफसर से जांच कराकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। यह भी कहा कि उस वक्त पुलिस ने जीडी में अंकित करके विधिक कार्रवाई की थी लेकिन मुकदमा नहीं किया था।

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