राहु-केतु का 27 मार्च 2019 को राशि परिवर्तन और उसका प्रभाव

लेखक परिचय
पी.पी.एस. चावला

ज्योतिष गणनाएं, राशिफल का करीब तीस साल का अनुभव। 80 के दशक से इस विषय में लेखन कर रहे हैं। आपके लेख  ”प्लेनेट्स एंड फॉरकास्ट” पत्रिका में प्रकाशित होते रहे हैं। इसमें प्रकाशित लेख ज्योतिष में परिवर्तन योग और जन्मस्थ शनि पर गोचरस्थ शनि के संचार का प्रभाव ने अच्छी ख्याति अर्जित की थी।

राहु-केतु का 27 मार्च 2019 को राशि परिवर्तनः  इसका विश्व और विभिन्न राशियों एवं लग्न पर प्रभाव

राहु- केतु को छाया ग्रह माना गया है। पिछले डेढ़ साल में राहु कर्क राशि से एवं केतु मकर राशि से गोचर में प्रभाव डाल रहे थे। इस दौरान राहु ने कुंभ, वृषभ, तुला एवं कन्या राशि वाले जातकों को अनुकूल प्रभाव दिया तथा धनु, मेष, सिंह तथा कर्क राशि वाले जातकों को विपरीत प्रभाव दिया। इसके अलावा अन्य राशियों वाले जातकों को सामान्य रूप से प्रभावित किया।

आने वाले डेढ़ वर्ष में राहु, मिथुन में (यह राहु की उच्च राशि मानी गई है) भ्रमण करेंगे तथा केतु धनु राशि (केतु की उच्च राशि मानी गई है) भ्रमण करेंगे। यानी सितंबर 2020 तक राहु का अनुकूल प्रभाव मेष, सिंह, कन्या व मकर राशि वाले जातकों को मिलेगा। कर्क, मीन, वृश्चिक राशि वाले जातकों को अभी सतर्क रहना पड़ेगा तथा अन्य राशि वाले जातकों को सामान्य रूप से फलदायी रहेगा।

केतु के धनु राशि में गोचर के कारण यह सितंबर 2020 तक तुला, कर्क, मेष, मीन तथा कुंभ राशि वाले जातकों को शुभ फलदायक रहेंगे। वृषभ, कन्या, मकर राशि वाले विपरीत फल दे सकते हैं तथा अन्य राशि वाले जातकों के लिए ये सामान्य फलदायक रहेंगे।

पाठक इस बात का ध्यान रखें कि केतु के धनु राशि में प्रवेश के साथ ही शनि के साथ युति भी बनेगी जिसके कारण जिन्हें शुभ फल मिलने हैं, वे और शुभ होंगे। इसके कारण विरोधियों पर विजय, रुके हुए कार्यों में प्रगति तथा अचानक लाभ मिलने की संभावना है। जिन्हें अशुभ फल मिलने हैं उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत, दुर्घटना, अग्नि तथा वाहन- शस्त्र आदि से सावधान रहने की जरूरत है।

जिनकी सूर्य राशि धनु है, उनके लिए केतु विशेष प्रसिद्धि का योग बना सकता है। जब केतु का भ्रमण लग्न से हो रहा हो तो सूर्य जिस राशि में स्थित हो उसके विशेष शुभ परिणाम मिल सकते हैं। इसी प्रकार राहू जब लग्न से भ्रमण करते हैं तो सूर्य जिस स्थान पर हो उस स्थान के बारे में चिंता हो सकती है। चूंकि आने वाले डेढ़ वर्ष में राहु उच्च राशि से भमण करेंगे अतः इस प्रकार के विपरीत फल कम रहेंगे लेकिन केतु के शुभ फल अवश्य मिलेंगे।

2019 से पहले मंगल दृष्टि भी धनु राशि पर रहेगी और इस प्रकार शनि, केतु व गुरु भी, जो कि 29 मार्च से 23 अप्रैल 2019 तक धनु राशि में भ्रमण करेंगे, इस दौरान मंगल की दृष्टि में रहेंगे जिसके कारण आवेश, क्रोध तथा आक्रामकता न केवल इन व्यक्तियों (वृषभ, कन्या, मकर राशि वाले जातक) को विपरीत रूप से प्रभावित करेगी, बल्कि इन लग्न तथा राशि वाले देश और प्रदेशों को भी सचेत रहना पड़ेगा, मंगल की धनु राशि पर दृष्टि तथा वहां शनि, केतु तथा गुरु की उपस्थिति न केवल मन बल्कि शस्त्रों, जमीन तथा आसमान में भी किसी प्रकार की हलचल या प्राकृतिक आपदा इत्यादि की घटना से सचेत रहने का संकेत देती है। पूर्व में भूकंप तथा विस्फोट इत्यादि घटनाएं इन्हीं ग्रहों या इसी प्रकार की युति तथा दृष्टि के कारण ही हुई हैं।

इस संबंध में 28-29 मार्च 2019 एवं 12 अप्रैल 2019 को भी ज्यादा सचेत रहने की आवश्यकता है।

आइए, अब इन ग्रहों के बारे में कुछ अन्य रोचक बातें भी जानते हैं-

  • केतु हमेशा राहु के विपरीत भ्रमण करता है, यह 180 डिग्री दूर है इसलिए जब हम केतु की बात करते हैं तो हम राहु के बारे में भी बात करते हैं।
  • केतु भी एक छाया ग्रह है और इसकी गति सूर्य और चंद्रमा के बिल्कुल विपरीत है या राहु की तरह इसकी गति हमेशा प्रतिगामी होती है।
  • केतु अपने चरण के दौरान आमतौर पर जीवन के एक विशेष क्षेत्र में है मूल्यों का ह्रास कर देता है। केतु को गुरु एवं मंगल राशियों में शुभ माना गया है। विशेष तौर पर धनु,मीन एवं वृश्चिक राशि में। केतु मंगल के प्रभावों में वृद्धि करता है।
  • इसे त्वरित, अचानक और अप्रत्याशित कर्म अदायगी समय भी कहा जा सकता है (विशेषकर इस बात के संबंध में कि राहु चरण के दौरान कर्म क्या किया गया है)।
  • केतु के प्रभाव में एक व्यक्ति को अंधविश्वास या तर्क विहीन व्यवस्था का सहारा लेने या उसका शिकार होने की संभावना रहेगी और गहरा आध्यात्मिक झुकाव हो सकता है विशेषकर अगर केतु आठवें या बारहवें भाव में उच्च राशि में स्थित हो।
  • जिनकी कुंडली में राहु और शनि की युति हो, विशेषकर मिथुन धनु राशि में, उनके लिए यह समय शक्ति और समर्थन वृद्धि का रहेगा। उन्हें  आश्चर्यजनक सफलता तथा प्रगति के अवसर मिलेंगे। विशेषकर वे जातक जिनकी कुंडली में यह युति तो हो ही साथ ही उनकी राशि भी यदि तुला, मेष, सिंह हो। कन्या तथा मकर राशि वाले जातकों को यह विशेष फल तभी  मिलेगा जबकि शनि राहु की युति मिथुन में हो, धनु में होने पर उन्हें सावधानी रखना पड़ेगी। राहु-केतु यदि अपनी उच्च राशि में न हों और पहले-सातवें भाव में स्थित हों तो वैवाहिक जीवन में परेशानी आने की संभावना बनी रहती है।

राहु-केतु के बारे में कुछ खास बातें

राहु को मायावी या राजनीतिक चालों, षड्यंत्रों, काला जादू इत्यादि के लिए भी जाना जाता है। इसे क्षणों में ही भारी लाभ अथवा हानि देने वाले क्षेत्रों जैसे जुआ, लॉटरी, घुड़दौड़ पर पैसा लगाना, शराब इत्यादि क्षेत्रों का कारक माना जाता है। इसके एकादश में स्थित होने पर विशेष लाभ की संभावना रहती है। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली की कुंडली में राहु एकादश में स्थित है तथा उसकी ही महादशा चल रही है। राहु दशम में होने पर राजनीतिक सफलता देता है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह की कुंडली में राहु दशम भाव में था और इस महादशा में (1975-1993 तक) उन्होंने निरंतर सफलता अर्जित की।

राहु एवं बुध की युति के कारण जातक परा शक्तियों का ज्ञाता भी बन सकता है। वह मंत्र का ज्ञाता बन सकता है तथा मंत्रोपचार की विधि में पारंगत। पर यह राहु नीच या शत्रु राशि में स्थित नहीं होना चाहिए। नीच राशि में होने पर जातक तंत्र या काला जादू इत्यादि में किसी को नुकसान पहुंचाने की मनःस्थिति बना सकता है।

राहु एवं शुक्र की युति विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षण तथा उनके उच्चस्थ होने पर सफलता तथा नीचस्थ होने पर दुराचारी प्रवृत्तियों में संलग्न कर सकता है।

राहु गुरु की युति चांडाल योग बनाती है तथा ऐसे व्यक्ति को अपने कार्य में धोखे तथा षड्यंत्र का शिकार बना सकती है।

चंद्र राहु की युति होने पर राजनीतिक सफलता मिलती है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की कुंडली में राहु चंद्र की युति वृषभ राशि में है जो कि दोनों की उच्च राशि है तथा यह राहु तृतीयस्थ है।

कुंडली में शुभ राहु का प्रबल प्रभाव कुंडली (3,6, 10,11 स्थानों में) धारक को विदेशों की सैर करवा सकता है तथा उसे एक या एक से अधिक विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी करवा सकता है। कुंडली में राहु के कमजोर (4,8, 12 स्थानों में) होने से  समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ये समस्याएं राजकीय,व्यावसायिक, पारिवारिक, स्वास्थ्य संबंधी हो सकती हैं।

सफल राजनेताओं की कुंडली में राहु का संबंध तीसरे, छठे, दसवें व ग्यारहवें भाव से देखा गया है।

अन्य राशियों के साथ होने पर राहु-केतु के प्रभाव इस तरह होते हैं

राहु-सूर्य : इन दोनों ग्रहों की युति को ग्रहण योग के रूप में जाना जाता है। इस दशा में हिलेरी क्लिंटन चुनाव नहीं जीत पाई जबकि उन्हें popular vote ज्यादा मिले।

यह व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और उसकी आंखे भी कमजोर हो जाती हैं। इस योग की वजह से उसके जीवन में मानहानि की आशंका बढ़ जाती है। इस समस्या को दूर करने के लिए नियमित रूप से सूर्य को पानी चढ़ाना चाहिए।

राहु-चंद्रमा : चंद्रमा और राहु ग्रह के संयोजन को अर्धग्रहण योग के नाम से भी जाना जाता है।

राहु-मंगल : इन दोनों ग्रहों के साथ होने पर अंगारक योग का निर्माण होता है। यह  क्रिक भावों में होने पर सशक्त बनाता है तथा 4,8, 12 में होने पर आपके लिए क्रोध और दुर्घटना जैसी समस्याओं में वृद्धि करता है।

राहु-बुध : इन दोनों ग्रहों की नकारात्मक युति से त्वचा से संबंधित समस्याओं का  सामना करना पड़ सकता है। इस योग को दूर करने के लिए आपको सुबह के समय तुलसी के पत्ते खाने चाहिए और सूर्य को पानी चढ़ाना चाहिए।

राहु-शुक्र : राहु और शुक्र ग्रह का साथ होना आपके चरित्र में दोष पैदा करता है। इसकी वजह से छोटी उम्र में ही व्यक्ति गलत संगत में पड़ जाता है। इसके प्रभाव से कई बार उस पर गलत आरोप भी लग सकते हैं। आप शिवजी की पूजा कर के इस समस्या को दूर कर सकते हैं।

सुबह पानी पीने से,चंदनयुक्त साबुन और अगरबत्ती के प्रयोग करने से शांति मिलती है। रोज रात को सोने से पहले आप गुनगुने पानी में नमक मिलाकर हाथ-पैर धोकर सोएं। ऐसा करने से राहु शांत होता है और अनावश्यक कष्टों से मुक्ति मिलती है। साथ ही नमक शरीर का दर्द दूर करता है और तनाव मुक्त रखता है। इससे आप रात को चैन की नींद सो पाएंगे और सुबह फालतू परेशानियों से दूर रह
पाएंगे।

हनुमान जी के मंदिर में पूजा, नारियल चढ़ाना,रसोईघर में खाना खाना, हाथी को केले या गन्ना इत्यादि खिलाना, काला कुत्ता पालना,लाल मसूर की दाल का दान, सफाई कर्मचारियों को खुश रखना, स्नानागार तथा टॉयलेट को साफ रखना,  मेद पहनना कुछ ऐसे सामान्य उपाय हैं जिन्हें किया जा सकता है।

केतु के लिए गणेशजी की आराधना, केले का दान, कान में छेद कर सोने की बाली पहनना कुछ सामान्य उपाय हैं।

सिंह लग्न
सिंह लग्न वाले जातकों के लिए सूर्य अगर लग्न में, चतुर्थ, पंचम, नवम, दशम या एकादश में हो तो माणिक्य धारण करना स्वयं के लिए, संपत्ति के लिए, संतान के लिए, भाग्य एवं पिता के लिए तथा लाभ की दृष्टि से उपयोगी रहेगा। यहां यह ध्यान रहे कि अगर शनि या राहु की महादशा चल रही हो तो इस दौरान माणिक्य धारण न करें।

सिंह लग्न वाले जातकों के लिए मंगल लग्न में तृतीय भाव में, चतुर्थ भाव में, पंचम भाव में, षष्ठम भाव में, नवम भाव में, दशम भाव में, एकादश भाव में हो तो मूंगा धारण करना उपयुक्त रहता है। इससे साहस में वृद्धि, स्थायी सम्पत्ति -भूमि भवन इत्यादि, संतान पक्ष, विरोधियों पर विजय, भाग्य वृद्धि, राजकीय कार्य में सहयोग, भूमि संबंधी कार्यों में लाभकारी स्थिति बन सकती है।

कन्या लग्न
कन्या लग्न वाले जातकों के लिए बुध अगर लग्न एवं दशम भाव में, एकादश भाव में हो तो लाभकारी रहेगा। प्रकाशन, लेखन, कविता इत्यादि कार्यों में विशेष सफलता मिल सकती है।

कन्या लग्न वाले जातको में अगर मंगल तृतीय भाव में हो तो मूंगा धारण करना साहस एवं अधिकार वृद्धि में सहायक होगा।

गुरु अगर एकादश में हो तो पुखराज धारण करना विवाहित जीवन, पार्टनरशिप, सामाजिक सम्मान, राजकीय लाभ इत्यादि में सहायक होगा।

शुक्र अगर नवम भाव में हो तो हीरा धारण करना भाग्य वृद्धि कारक होगा।

राहु अगर दशम, एकादश भाव में हो तो गोमेद धारण करना राजनीति में तथा राजनैतिक व्यक्तियों से लाभकारी स्थितियां निर्मित करने में सहायक होगा।
केतु अगर तृतीय, एकादश भाव में हो तो लहसुनिया धारण करने से लाभकारी रहेगा।

तुला लग्न
तुला लग्न वाले जातकों के लिए शनि अगर लग्न, तृतीय, चतुर्थ, पंचम भाव में हो तो नीलम धारण करना लाभकारी रहेगा। आध्यात्म, भूमि भवन, सृजनात्मकता, संतान के संबंध में लाभ होगा तथा व्यवसाय में लोहे तथा भवन इत्यादि से संबंधित कार्यों में लाभकारी रहेगा।

शुक्र अगर लग्न में हो तो हीरा धारण करना सृजनात्मकता, अभिव्यक्ति, संचार, कला, सिनेमा, इंटीरियर डेकोरेशन तथा अन्य संबंधित कार्यों में लाभकारी रहेगा।
चंद्रमा अगर लग्न या दशम भाव में हो तो मोती धारण करना राज्य कार्यों में, जल संबंधी कार्यों में, कला, सृजन इत्यादि के कार्यों में शुभ रहेगा।

वृश्चिक लग्न
वृश्चिक लग्न वाले जातकों के लिया मंगल अगर लग्न, तृतीय, षष्ठ, दशम भाव में हो तो मूंगा धारण करना श्रेयस्कर रहेगा। साहस, अधिकार वृद्धि, विरोधियों पर विजय, राज्य से लाभ, भूमि, खनन इत्यादि कार्यों से लाभकारी स्थितियां निर्मित करेगा।

गुरु अगर नवम भाव में हो तो पुखराज धारण किया जा सकता है जो कि भाग्योदय कारक रहेगा।
चंद्रमा अगर पंचम या नवम भाव में हो तो मोती धारण करना शुभ रहेगा।

धनु लग्न
धनु लग्न वाले जातकों के लिए गुरु अगर लग्न में, चतुर्थ भाव में, पंचम भाव में, नवम भाव में, एकादश भाव में हो तो पुखराज धारण करना आत्मसम्मान के लिए, भूमि भवन के लिए, शिक्षा के व्यवसाय में शुभ रहेगा।

राहु अगर तृतीय, षष्ठ या दशम, एकादश भाव में हो तो गोमेद धारण करना लाभकारी रहेगा। यह राजनीतिक सफलता, विरोधियों पर विजय अधिकार वृद्धि में सहायक होगा।

सूर्य अगर नवम, दशम, प्रथम, पंचम भाव में हो तो माणिक्य धारण करने से सम्मानजनक स्थितियां बनेंगी।

केतु अगर लग्न में हो तो लहसुनिया धारण करना शुभ रहेगा।

मकर लग्न
मकर लग्न वाले जातकों के लिए शनि अगर लग्न में, दशम में हो तो नीलम धारण करने से दर्शन शास्त्र, अध्यात्म, लोहे के कार्य, राज्य से लाभ, तेल इत्यादि के व्यवसाय में लाभकारी स्थितयां बनेंगी।

शुक्र अगर तृतीय, पंचम, दशम भाव में हो तो हीरा धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा, संतान, राज्य पक्ष में सफलता मिलेगी।

केतु अगर तृतीय भाव में हो तो लहसुनिया धारण करना शुभ रहेगा।

कुम्भ लग्न
कुम्भ लग्न वाले जातकों के लिए शनि अगर लग्न आयाम दशम भाव में हो तो नीलम धारण करने से दर्शन शास्त्र, अध्यात्म, लोहे के कार्य, तेल इत्यादि के व्यवसाय में लाभकारी स्थितियां बनेंगी।

शुक्र अगर द्वितीय, चतुर्थ, नवम, एकादश भाव में हो तो विपरीत योनि वाले व्यक्तियों से लाभ, डेकोरेशन, बाग बगीचे से संबंधित कार्य, कपड़े का व्यवसाय, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट इत्यादि कार्य में तथा तथा अन्य संबंधित कार्यों में लाभकारी रहेगा।

मंगल अगर दशम भाव में हो तो मूंगा धारण करने से लाभ हो सकता है।
केतु अगर दशम भाव में हो तो लहसुनिया धारण करना शुभ रहेगा।

मीन लग्न
मीन लग्न वाले जातकों के लिए गुरु अगर लग्न, पंचम, नवम भाव में हो तो पुखराज धारण करना आत्मसम्मान के लिए, भूमि भवन के लिए, भाग्योदय करक, शिक्षा के व्यवसाय में शुभ रहेगा।

राहु अगर तृतीय भाव में हो, गुरु की दशा न चल रही हो तो गोमेद धारण करना शुभ होगा अधिकार वृद्धि में सहायक होगा।

केतु अगर लग्न में हो तो लहसुनिया धारण करना शुभ रहेगा।

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