रिजर्व बैंक का रुख पलट सकती है बढ़ती हुई महंगाई

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चैतन्य भारत न्यूज 

महंगाई के एक बार फिर लगातार बढ़ने के संकेत हैं। इसका असर रिजर्व बैंक की नीतियों पर हो सकता है, जो कम महंगाई के कारण पिछले कुछ महीनों से नरम रहा है। लेकिन, यदि महंगाई का मौजूदा रुझान आगे भी जारी रहा तो रिजर्व बैंक का रुख पलट सकता है, जो बाजार के लिए नकारात्मक होगा।

देश में थोक कीमतों (डब्ल्यूपीआई) के हिसाब से महंगाई दर लगातार दूसरे महीने बढ़ी है। 15 अप्रैल को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खाने-पीने की चीजें और ईंधन महंगे होने की वजह से मार्च में थोक भाव की महंगाई दर बढ़कर 3.18 प्रतिशत हो गई। फरवरी में डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई दर 2.93 प्रतिशत और मार्च, 2018 में 2.74 प्रतिशत थी।

पिछले महीने खास तौर पर सब्जियों के भाव अचानक बढ़ने के कारण खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर बढ़ी है। मार्च के दौरान थोक में सब्जियों की महंगाई दर 28.13 प्रतिशत दर्ज की गई, जो फरवरी में महज 6.82 प्रतिशत थी। राहत की बात यह रही कि मार्च में आलू की महंगाई दर घटकर केवल 1.30 प्रतिशत रह गई, जो फरवरी में 23.40 प्रतिशत थी। समग्र तौर पर मार्च के दौरान खाद्य श्रेणी में महंगाई दर 5.68 प्रतिशत रही। खाने-पीने की चीजों के अलावा ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई दर भी मार्च में बढ़कर 5.41 प्रतिशत हो गई, जो फरवरी में 2.23 प्रतिशत थी। जाहिर है, इस मामले में महंगाई दोगुनी से ज्यादा बढ़ी है, जो चिंता का विषय हो सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की रूपरेखा तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा कीमतों (सीपीआई) के हिसाब से महंगाई दर को ध्यान में रखता है। इस मामले में स्थिति नियंत्रण में नजर आने के कारण आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत कटौती की थी। पिछले हफ्ते जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मार्च में सीपीआई आधारित महंगाई दर बढ़कर 2.86 प्रतिशत हो गई, जो फरवरी में 2.57 प्रतिशत थी।

बहरहाल, इस साल अप्रैल-सितंबर अवधि के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने 2.9-3 प्रतिशत महंगाई दर (खुदरा कीमतों के हिसाब से) रहने का अनुमान लगाया है। केंद्रीय बैंक का अंदाजा है कि इस दौरान खाने-पीने की चीजें और ईंधन की कीमतें कमतर रहेंगी। इसके अलावा मानसून की बारिश भी सामान्य होगी, जिसके कारण कृषि उत्पादों के मामले में आपूर्ति की स्थिति अच्छी रहेगी।

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