श्री वेणी माधव मंदिर प्रयागराज : यहां माधव के 12 स्‍वरूपों के दर्शन का मिलता है सौभाग्‍य

 प्रयागराज में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दुर्लभ 12 माधव को अब सर्किट से जोडऩे की कवायद शुरू हुई है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) के इंजीनियरों ने 12 माधव मंदिरों का सर्वे चालू कर दिया है। इंजीनियरों द्वारा हालात की रिपोर्ट देने के बाद डिटेल्स प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार होगी। कोशिश है कि जल्द डीपीआर फाइनल करके स्वीकृति के लिए शासन को भेज दी जाए। सर्किट से जुडऩे पर श्रद्धालु 12 माधव की महिमा जान सकेंगे।

प्रयाग का धार्मिक महत्व पवित्र नदियां गंगा, यमुना व अदृश्‍य सरस्वती की मिलन स्थली संगम के साथ माधव का वास बढ़ाता है। माधव प्रयाग के प्रधान देवता हैं। दुनिया में यही पवित्र क्षेत्र है, जहां माधव के 12 स्वरूपों के दर्शन का सौभाग्य मिलता है। हालांकि, मुगलकाल में इन मंदिरों को नष्ट कर दिया गया था, जिस पर लोगों ने कब्जा भी कर लिया।

मंडलायुक्त संजय गोयल ने 12 माधव को सर्किट से जोडऩे के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश प्राधिकरण के अधिकारियों को दिया है। उसी क्रम में सर्वे शुरू कर दिया गया है। सर्किट से जोडऩे के लिए आवश्यक सुविधाओं का आकलन सर्वे के बाद हो सकेगा लेकिन, माना जा रहा है कि इन मंदिरों के विकास के लिए संपर्क मार्गों, शौचालयों, स्नानगृहों, विश्रामालयों, बेंच, लाइटों आदि की आवश्यकता पड़ेगी। प्रयाग धर्म संघ के अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल का कहना है कि प्रतिमाओं की पुनर्स्‍थापना भी होनी चाहिए।

प्रयागराज विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अरविंद चौहान का कहना है कि 12 माधव को सर्किट से जोड़ने का डीपीआर तैयार हो रही है। डीपीआर बनने पर बजट आदि का आकलन हो सकेगा।

झूंसी में श्री संकष्टहर माधव, दारागंज में श्री वेणी माधव और श्री असि माधव, अरैल में श्री चक्र माधव और श्री आदि माधव का वास है। किला में श्री अक्षय माधव, छिवकी में श्री गदा माधव और चौफटका क्षेत्र में भी अनंत माधव का वास होने की मान्यता है। श्री शंख माधव का छतनाग और श्री बिंदु माधव का निवास द्रौपदी घाट के पास माना जाता है। श्री पद्म माधव का वास बीकर घूरपुर और श्री मनोहर माधव का जानसेनगंज में है।

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