सनातन संस्कृति वैभव व परंपरा के संवाहक संन्यासियों के अखाड़ों में मची खींचतान पहुंच सकती है अदालत

सनातन संस्कृति, वैभव व परंपरा के संवाहक संन्यासियों के अखाड़ों की एकता पद के लिए टूट गई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़े 13 अखाड़े दो गुट में बंट गए हैं। सात अखाड़ों ने श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी को नया अध्यक्ष तथा निर्मोही अनी अखाड़ा के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास को महामंत्री चुन लिया है। प्रयागराज में 25 अक्टूबर को प्रस्तावित बैठक में छह अखाड़े ही अध्यक्ष सहित नई कार्यकारिणी का चुनाव करेंगे। दोनों गुट बहुमत होने की बात कह रहे हैं। कोर्ट में भी याचिका दाखिल करने की तैयारी है।

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की 20 सितंबर को मृत्यु के बाद अध्यक्ष पद को लेकर अखाड़ों में खींचतान शुरू हुई। नए अध्यक्ष, कार्यकारिणी के संबंध में फैसले के लिए परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने 25 अक्टूबर को श्रीनिरंजनी अखाड़ा के प्रयागराज स्थित आश्रम में बैठक बुलाई है। इससे पहले सात अखाड़ों, श्रीमहानिर्वाणी, अटल, बड़ा उदासीन, निर्मल, श्रीनिर्मोही अनी, श्रीनिर्वाणी अनी व श्रीदिगंबर अनी अखाड़ा से जुड़े संतों ने 20 अक्टूबर की रात हरिद्वार में नई कार्यकारिणी बना ली। इसे जूना, अग्नि, आह्वान, श्रीनिरंजनी और अटल अखाड़ा मान्यता नहीं दे रहे हैं। नया उदासीन अखाड़ा बैठक में शामिल होगा। निर्मल अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत देवेंद्र शास्त्री कहते हैं कि बहुमत हमारे साथ है। हर तीन साल में नई कार्यकारिणी का चुनाव होगा। श्रीनिरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी कहते हैं कि बैठक बुलाने का अधिकार महामंत्री को है, उन्होंने 25 अक्टूबर को बैठक बुलाई है, इसके पहले कोई भी चुनाव अवैधानिक है। उन्होंने कहा कि वैरागी संप्रदाय के तीनों अखाड़े हरिद्वार कुंभ से ही परिषद से अलग हैं, परिषद में बचे अखाड़ों की संख्या 10 ही है। पद की लालच में वैरागियों को लेकर चुनाव कराने की बात अनुचित है। इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी। इधर नए गुट के महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्र दास ने कहा कि सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी बनी है। अगर कोई कोर्ट जाएगा तो हम वहां जवाब देने के लिए तैयार हैं।

‘अखाड़ा परिषद लोकतांत्रिक संगठन है। पदाधिकारियों के चुनाव के लिए नियम व परंपराएं हैं। मैंने 25 अक्टूबर को बैठक बुलाई है। रही बात, 20 अक्टूबर को हुए चुनाव की तो वह नियम-कानून व परंपरा विरुद्ध है। जरूरत पड़ने पर कोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी।’

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