सीबीआई को मिला आनंद गिरि का लैपटॉप और आईफोन

आश्रम का डीवीआर गायब

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच कर रही सीबीआई बुधवार दोपहर प्रयागराज पुलिस लाइन से आनंद गिरि को लेकर हरिद्वार पहुंची। उनकी निशानदेही पर आश्रम में छापमारी की। वहां से आनंद गिरि का लैपटॉप, आईफोन आदि सामान बरामद कर लिया। 

इस दौरान पता चला कि सीबीआई के पहुंचने से पहले ही आनंद गिरि के आश्रम से किसी ने डीवीआर गायब कर दिया है। यह सुनते ही सीबीआई के अफसर भड़क उठे। अब सीबीआई आश्रम में चोरी करने के आरोप में पकड़े गए संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ करेगी। देर रात तक सीबीआई छानबीन में जुटी रही।

नरेंद्र गिरि की मौत के बाद यूपी पुलिस आनंद गिरि को बीती 20 सितंबर की रात हरिद्वार स्थित गाजीवाला आश्रम से पकड़कर प्रयागराज लाई थी। एसआईटी ने आनंद गिरि को जेल भेज दिया, लेकिन सीबीआई ने जब तफ्तीश शुरू की तो आंनद समेत तीनों आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर ले लिया। 

बुधवार को सीबीआई की एक टीम आनंद गिरि को फ्लाइट से लेकर देहरादून पहुंची। वहां से सीबीआई टीम आनंद गिरि को लेकर पांच गाड़ियों से हरिद्वार स्थित उनके आश्रम पहुंची। टीम को लीड सीबीआई के डीआईजी कर रहे थे। आश्रम के अंदर चले तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई ने न केवल आनंद गिरि के आईफोन व लैपटॉप कब्जे में लिया बल्कि उनके चारों सेवादारों का मोबाइल भी जब्त कर लिया। उनके आईफोन की डेटा रिकवरी कराने की तैयारी चल रही है। 

वहीं, आश्रम पहुंचने पर आनंद गिरि ने मीडिया को देखते ही कहा कि सीबीआई जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। इस दौरान सीबीआई को बताया गया कि चार दिन पहले ही आनंद गिरी के आश्रम में एक युवक घुस आया था, जिसे आसपास के लोगों ने चोरी करते हुए पकड़ा था। 

श्यामपुर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन आरोपी के पास से डीवीआर बरामद नहीं हुआ था। सीबीआई ने आश्रम से जुड़े दो लोगों से पूछताछ की। दूसरी ओर श्यामपुर के तत्कालीन एसओ अनिल चौहान का कहना है कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन उसके पास से पुलिस को डीवीआर बरामद नहीं हुआ था।

डीवीआर गायब होना, साजिश या महज संयोग

आनंद गिरि के हरिद्वार स्थित आश्रम से डीवीआर गायब होने के बाद सीबीआई का संदेह और गहराया गया है। इसके कई तर्क हैं। अव्वल तो यह है कि आनंद गिरि की गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उनके आश्रम को सील कर दिया था तो वहां चोर घुसा कैसे। इस पूरे मामले में डीवीआर एक महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता था। 

इसके जरिये सीबीआई को आसानी से पता चल जाता कि महंत नरेंद्र गिरि की मौत के समय और उससे पूर्व उनके आरोपित शिष्य के आश्रम में क्या-क्या गतिविधियां चल रही थी। उन लोगों के बारे में भी जानकारी होती जो पिछले तीन-चार दिनों में आनंद गिरि से मिलने के लिए आश्रम आये थे। 

ऐसे लोगों से पूछताछ में सीबीआई को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती थी। डीवीआर के गायब होने पर यह सवाल उठना स्वभाविक है कि ये चोरी की आम घटना है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हुई है। इसी से पर्दा उठाने के लिए सीबीआई अब जेल में बंद उस संदिग्ध से पूछताछ करेगी जिसे चोरी के आरोप में पकड़ा गया था।

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