सुपरवाइजरी कमेटी के गठन पर असहमत थे श्री मठ बाघम्बरी गद्दी के नए महंत बलवीर गिरि

श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी के नए महंत बलवीर गिरि के कार्यों की निगरानी के लिए श्रीनिरंजनी अखाड़ा ने पांच सदस्यीय सुपरवाइजरी कमेटी बनाई है। इसमें श्रीमहंत हरगोविंद गिरि, श्रीनिरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी, केशव गिरि, दिनेश गिरि और ओंकार गिरि शामिल हैं। कमेटी के सदस्य महंत के कार्यों की निगरानी करेगी। महंत के पास मठ की संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं होगा। महत्वपूर्ण कदम उठाने से पहले उन्हें कमेटी की सहमति लेनी होगी।

बलवीर अपने ऊपर किसी कमेटी को नहीं रखना चाहते थे

इस कमेटी के गठन को लेकर देर रात तक श्री निरंजनी अखाड़ा के महात्माओं में मंथन चला था। कहा जा रहा है कि पहले बलवीर गिरि अपने ऊपर किसी को रखने के लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि वह अखाड़े के पंच परमेश्वर में शामिल हैं। समस्त नियम व कानून को मानते हैं। ऐसे में उनके कार्यों की निगरानी के लिए कमेटी बनाना अनुचित है। उधर श्रीनिरंजनी अखाड़ा के महात्मा सुपरवाइजरी कमेटी बनाने पर अड़े रहे। साफ कर दिया कि श्री मठ बाघम्बरी गद्दी का संचालन अखाड़े के जरिए होता आया है। यह अखाड़े का हिस्सा है, इसलिए इसकी संपत्तियों, आश्रम, मंदिर व जमीन की सुरक्षा के लिए अखाड़े की निगरानी जरूरी है। बलवीर की उम्र कम होने व अनुभव के अभाव की बात कही गई। बातचीत में सहमति बनने पर देर रात पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई। पट्टाभिषेक के बाद बलवीर ने पत्रकारों से बातचीत में भी कहा कि वह अखाड़े के नियम व निर्देशों का पूरा पालन करेंगे।

गंगा व हनुमान जी की उतारी आरती

प्रयागराज : श्री मठ बाघम्बरी गद्दी का महंत बनने के बाद बलवीर गिरि मंगलवार शाम बंधवा स्थित लेटे हनुमान मंदिर गए। वहां की व्यवस्था देखी। पुजारियों व श्रद्धालुओं से वार्ता की। फिर विधि-विधान से हनुमान जी की आरती उतारी। मां गंगा की आरती भी उतारी। उनसे मिलने के लिए लोगों में उत्सुकता रही।

त्रिकाल भवंता व कौशल्यानंद आयीं

महंत नरेंद्र गिरि को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए परी अखाड़ा की पीठाधीश्वर त्रिकाल भवंता व किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि भी आयी थीं। दोनों ने बलवीर गिरि को चादर भी ओढ़ाई। महंत नरेंद्र गिरि दोनों अखाड़ों का विरोध करते थे। उन्होंने कभी इन्हें मान्यता नहीं दी।

देर शाम तक चला भंडारा

श्री मठ बाघम्बरी गद्दी स्थित श्रीमहंत विचारानंद संस्कृत महाविद्यालय परिसर में मंगलवार सुबह से भीड़ जुटने लगी। तय समयानुसार 11 बजे नरेंद्र गिरि की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आरंभ हुई। महात्माओं ने अपने विचार व्यक्त किए। दोपहर 12.30 बजे पट्टाभिषेक शुरू हुआ। यह एक घंटे चला। षोडशी भंडारा डेढ़ बजे से शुरू होकर देर शाम तक चलता रहा। प्रयाग के अलावा हरिद्वार, नासिक, उज्जैन, जयपुर, मुंबई सहित अनेक शहरों से भक्त और संत आए थे। पट्टाभिषेक होने के बाद गुद्दड़ अखाड़े के महात्माओं ने भोजन किया। उन्हें भोजन कराकर 16 प्रकार का दान दिया गया। तत्पश्चात भंडारा आरंभ हुआ। भंडारा में जूना, निरंजनी, महानिर्वाणी, अग्नी, आह्वान, अटल, आनंद, निर्मल, नया उदासीन, बड़ा उदासीन अखाड़े के महात्माओं व भक्तों ने भंडारा का प्रसाद ग्रहण किया।

कुछ ऐसे किया ब्रह्मलीन महंत को याद

नरेंद्र गिरि की कमी पूरी करना असंभव है। वह दूरदर्शी, कुशल नेतृत्वकर्ता और करुणामयी महात्मा थे। अखाड़ा परिषद को उन्होंने नई ऊंचाई पर पहुंचाया।

-महंत हरि गिरि, महामंत्री अखाड़ा परिषद

श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में पहली बार नरेंद्र गिरि की गैर मौजूदगी में आया हूं। अपनी व्यथा व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।

-श्रीमहंत प्रेम गिरि, अध्यक्ष जूना अखाड़ा

महंत नरेंद्र गिरि का जीवन संतों व सनातन धर्म को समर्पित था। वह विपरीत परिस्थिति से कभी घबराए नहीं, उनका न होना व्यक्तिगत क्षति है।

-स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी, पीठाधीश्वर टीकरमाफी आश्रम

नरेंद्र गिरि का असमय ब्रह्मलीन होना सनातन धर्म के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने संतों के सम्मान को कभी गिरने नहीं दिया।

-महामंडलेश्वर यतींद्रानंद

नरेंद्र गिरि से 2001 से मेरा संबंध था। अपने-अपने अखाड़े में हमें जिम्मेदारियां मिलीं। नरेंद्र गिरि ने हर भूमिका में बेहतर काम किया था।

-श्रीमहंत रवींद्र पुरी, सचिव श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा

नरेंद्र गिरि श्रेष्ठ संत थे। उन्होंने अखाड़ा परिषद के जरिए सनातन धर्म के वैभव को दुनियाभर में फैलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

-देवेंद्र शास्त्री, उपाध्यक्ष अखाड़ा परिषद

महंत नरेंद्र गिरि ने सम्मान से कभी समझौता नहीं किया। सम्मान के लिए जीवनभर त्याग किया। लोभ व मोह से दूर रहे।

-सुरेश त्रिपाठी, शिक्षक विधायक

महंत नरेंद्र गिरि सच्चे महात्मा थे, उन्होंने सम्मान को जीवन से ऊपर रखा। साधुता व संस्कार उनके अंदर भरा था।

-संत ज्ञान सिंह

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