सुर, लय, ताल से संगमनगरी की सड़कों पर सजा आजादी का स्मरणोत्सव

रंग-बिरंगे परिधानों में सज धज कर लोक कलाकारों ने मंगलवार को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के स्मरणोत्सव को सुर, लय, ताल से संगमनगरी की सड़कों पर यादगार बनाने के साथ ही इसे देश भक्ति गीतों से अक्षुण्य रखने का संदेश भी दिया।

कहीं घोड़ा नृत्य तो कहीं धोबिया नृत्य की थिरकन के साथ लोक कलाकारों के दल निकले तो एक बारगी लोगों के कदम ठहर गए।  झांझ, मजीरा के साथ लोक गीतों के सुरों में देशभक्ति का जज्बा था। इस कला यात्रा में प्रयागराज, कौशाम्बी और प्रतापगढ़ के 750 लोक कलाकारों ने हिस्सा लिया।

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत संस्कृति विभाग की ओर से निकाली गई इस कला यात्रा को दोपहर दो बजे केपी इंटर कॉलेज के मैदान पर डीएम संजय खत्री ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसी के साथ सैकड़ों कलाकारों के दल रंग-बिरंगी ध्वज-पताकाएं लेकर बाजेगाजे के साथ निकल पड़े। रंग-बिरंगी वेशभूषा में लोक कलाकारों के दल निकले तो लोग देखते रहे।

यह कला यात्रा केपी इंटर कॉलेज मैदान से एमजी मार्ग पर मेडिकल चैराहे से लाउदर रोड, ऋषि भरद्वाज आश्रम, बालसन चौराहा, थार्नहिल रोड की ओर मुड़कर चंद्रशेखर आजाद पार्क द्वार से हिंदू हॉस्टल से होते हुए लोक सेवा आयोग से आगे हनुमान मंदिर पहुंची। यहां से यात्रा सिविल लाइंस होते हुए सीएवी इंटर कॉलेज परिसर में दाखिल हुई।

इस यात्रा में डीएम के अलावा सीडीओ शिपू गिरि, जिला विकास अधिकारी एके मौर्या, कलाविद् अतुल यदुवंशी के अलावा कई अफसरों ने लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। रास्ते भर घोड़ा नृत्य, ढेड़िया नृत्य के अलावा अल्हा, बिरहा, कजरी की शैलियों में देशभक्ति गीतों के साथ कलाकार झूमते-नाचते नजर आए। यात्रा में शामिल इन लोक कलाकारों के अलावा एनसीसी, एनएसएस, स्काउट गाइड के छात्रों ने भी बैंड के साथ मोहक प्रदर्शन किया। क्षेत्रीय पांडुलिपि अधिकारी गुलाम सरवर ने कला यात्रा का संयोजन किया। 

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