हिंदी दिवस विशेष :-

जिस हिन्दी को आज हम बोलते-सुनते-पढ़ते हैं, वो 3400 साल में बनी है। 1500 ईसा पूर्व में हिन्दी की मां कही जाने वाली संस्कृत की शुरुआत हुई थी। 1900 ईसवी में हिन्दी खड़ी बोली में लिखना-पढ़ना शुरू किया गया।

हिन्दी दिवस के मौके पर हम इसी हिन्दी भाषा का पूरा इतिहास लेकर आए हैं। इसमें पैदा होने से लेकर बड़े होने तक की पूरी कहानी है।

आज जिस हिन्दी को हम लिखते-बोलते हैं वो 120 साल की है, लेकिन इसकी जड़ें 3520 साल पुरानी हैं

हिंदी बोलने वाले 90 फीसदी से ज्यादा लोग 12 राज्यों से, बाकी राज्यों में सिर्फ इतनी आबादी की भाषा है हिंदी

भारत में हिंदी को पहली भाषा के तौर पर इस्तेमाल करने वालों की सबसे कम संख्या दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत में है। लक्षद्वीप में सिर्फ 0.2 फीसदी लोग हिंदी बोलते हैं। वहीं, मिजोरम में 0.97 फीसदी आबादी ही बोलचाल में हिंदी का इस्तेमाल करती है।

भारत में आज हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। अगर आंकड़ों के आधार पर बात करें तो अंग्रेजी, स्पैनिश और मंदारिन के बाद हिंदी दुनिया में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। सिर्फ भारत ही नहीं, हिंदी बोलने और लिखने वाले लोग इस वक्त फिजी से लेकर नेपाल और दक्षिण अफ्रीका तक मिल जाएंगे। हालांकि, हिंदीभाषियों को बड़ा जमावड़ा भारत में ही है। वह भी अधिकतर आबादी उत्तर भारत में ही बसी है। आखिरी जनगणना के डाटा को आधार बनाएं तो देश में करीब 43.63 फीसदी जनता की पहली भाषा हिंदी पाई गई। यानी आज से 10 साल पहले देश के 125 करोड़ लोगों में से लगभग 53 करोड़ लोग हिंदी को ही मातृभाषा मानते थे।

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