सावन 2020: ये हैं देश में अलग-अलग स्थानों पर स्थित भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंग

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चैतन्य भारत न्यूज 

आज सावन का पहला सोमवार है। सावन माह में जो भी भक्त भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम जपता है उसके सातों जन्म तक के पाप नष्ट हो जाते हैं। भोलेनाथ के सबसे प्रिय माह सावन में चैतन्य भारत न्यूज द्वारा सभी बारह ज्योतिर्लिंगों की विशेषता की खास प्रस्तुति दी जाएगी।

क्या है ज्योतिर्लिंग?

हिन्दू धर्मग्रंथों में शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख मिलता है। जहां-जहां ये ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं, वहां भव्य शिव मंदिर बने हुए हैं। शिवपुराण में वर्णित है कि ब्रह्म, माया, जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को ज्योतिर्लिंग कहा गया है। शिवपुराण के मुताबिक, आकाश से ज्‍योति पिंड पृथ्‍वी पर गिरे और उनसे थोड़ी देर के लिए प्रकाश फैल गया। इसी तरह अनेक उल्का पिंड आकाश से धरती पर गिरे थे लेकिन हजारों पिंडों में से प्रमुख 12 पिंड को ही ज्योतिर्लिंग में शामिल किया गया है।

जानिए कहां-कहां स्थापित है ज्योतिर्लिंग

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। कहा जाता है कि, विदेशी आक्रमणों के कारण यह 17 बार नष्ट हो चुका है। हर बार यह बिगड़ता और बनता रहा है।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आन्ध्रप्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है। कहा जाता है कि, इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन नगरी में स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता है कि, यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां सुबह होने वाली भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां के लोगों का मानना है कि,  भगवान महाकालेश्वर ही उनके राजा हैं और वे ही उज्जैन नगरी की रक्षा कर रहे हैं।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप स्थित है। जहां यह ज्योतिर्लिंग स्थित है, उस स्थान पर नर्मदा नदी है। पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता है।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में स्थित है। केदारनाथ समुद्र तल से 3584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। केदारनाथ का वर्णन स्कंद पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर की विशेषता है कि, जो भक्त श्रृद्धा से सुबह सूर्य निकलने के बाद ज्योतिर्लिंग के दर्शन करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं।

काशीविश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग उत्तरप्रदेश के काशी नामक स्थान पर स्थित है। इस स्थान की मान्यता है, कि संकट आने पर भी यह स्थान बना रहेगा। सभी धर्म स्थलों में काशी का अत्यधिक महत्व बताया गया है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग

यह महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के पास ब्रह्मागिरि नाम का पर्वत है। कहा जाता है कि, भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग रूप में रहना पड़ा।

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग झारखण्ड प्रांत, पूर्व में बिहार प्रांत के संथाल परगना के दुमका नामक जनपद में पड़ता है। इस ज्योतिर्लिंग की गिनती नौवें स्थान पर होती है। इस स्थान को वैद्यनाथ धाम भी कहा जाता है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के बाहरी क्षेत्र द्वारिका स्थान में स्थित है। द्वारका से भी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूरी 17 मील की है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि, जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां दर्शन के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु राज्य के रामनाथ नामक स्थान में स्थित है। कहा जाता कि, इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना भगवान श्रीराम ने की थी। जिसके चलते इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया है।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के संभाजीनगर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है। शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है। एलोरा की प्रसिद्ध गुफाएं इस मंदिर के समीप स्थित हैं। यहां श्री एकनाथजी गुरु व श्री जनार्दन महाराज की समाधि भी है। यहां के मंदिर को घृसणेश्वर या घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है।

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