14 माह की बच्ची ने लॉटरी में जीता 16 करोड़ का इंजेक्शन, मिला नया जीवन

चैतन्य भारत न्यूज

कर्नाटक के तटीय उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल शहर के मोहम्मद बासिल और खदीजा की 14 महीने की बेटी फातिमा को 16 करोड़ के इंजेक्शन से बचा लिया गया है। मुंबई की तीरा और झारखंड की सृष्टि की तरह फातिमा भी एसएमए टाइप वन (स्पाइनल मस्कुलर एट्राफी) नामक एक दुर्लभ बीमारी से ग्रसित है। वह बेंगलुरु के बैपटिस्ट अस्पताल में भर्ती हैं।

फातिमा की सेहत में हो रहा सुधार

दरअसल, फातिमा के नाम 16 करोड़ की लॉटरी खुल गई, जिससे उसे यह इंजेक्शन ‘ज़ोलगेन्समा’ (Zolgensma) लगाया गया। फातिमा पिछले महीने के आखिर में बेंगलुरु बैपटिस्ट अस्पताल में जीन थेरेपी ‘ज़ोलगेन्समा’ देने के बाद ठीक हो रही हैं। अस्पताल ने कहा कि वह ड्रग कंपनी नोवार्टिस द्वारा एक कल्याणकारी प्रोग्राम के माध्यम से ‘लॉटरी का भाग्यशाली विजेता’ बनकर उभरी। इससे मिले धन से उसे महंगे इलाज में मदद मिली।

लॉटरी के कारण नसीब हुआ टीका

राज्य में पहली बार इस अस्पताल में किसी बाल मरीज को यह टीका लगा है। अस्पताल के निदेशक डॉ. नवीन थॉमस ने कहा कि 21 जनवरी को 14 महीने की बच्ची को यह वैक्सीन लगाई गई। परिवार उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल का रहने वाला है। नोवार्टिस (Novartis) की ओर से आयोजित लॉटरी की भाग्यशाली विजेता होने के कारण बच्ची को टीका नसीब हुआ।

38 बच्चों ने इंजेक्शन ना मिलने का कारण तोड़ा दम

न्यूरोमस्कुलर विशेषज्ञ डॉ. एन. एग्नेस मैथ्यू ने बताया कि, ‘बच्ची की सेहत में सुधार है। वह पूरी तरह से स्वस्थ होने की ओर अग्रसर है। उन्हें उस दिन का इंतजार है जब देश के हर मरीज को यह वैक्सीन लगाई जा सकेगी।’ गंभीर और दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से जूझ रहे करीब 200 बच्चों का अस्पताल में उपचार जारी है। पिछले वर्ष 38 बाल मरीजों ने महंगे उपचार के कारण दम तोड़ दिया।

क्या है इंजेक्शन की खासियत

जोलगेन्स्मानामक नामक यह इंजेक्शन अमरीका से मंगाया जाता है। इस इंजेक्शन की खासियत ये है कि यह बच्चों की मांसपेशियों को कमजोर कर उन्हें हिलने-डुलने और सांस लेने में समस्या पैदा करने वाले जीन को निष्क्रिय कर देता है, यानी यह तंत्रिका कोशिकाओं के लिए जरूरी प्रोटीन का उत्पादन शुरू कर देता है।

क्या है SMA बीमारी?

स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (SMA) बीमारी हो तो शरीर में प्रोटीन बनाने वाला जीन नहीं होता। इससे मांसपेशियां और तंत्रिकाएं (Nerves) खत्म होने लगती हैं। दिमाग की मांसपेशियों की एक्टिविटी भी कम होने लगती है। सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। चूंकि मस्तिष्क से सभी मांसपेशियां संचालित होती हैं, इसलिए सांस लेने और भोजन चबाने तक में दिक्कत होने लगती है। SMA कई तरह की होती है, लेकिन इसमें Type 1 सबसे गंभीर है। यह बीमारी ज्यादातर बच्चों को ही होती है और बाद में दिक्कत बढ़ने के साथ मरीज की मौत हो जाती है। ब्रिटेन में ये बीमारी ज्यादा है और वहां करीब 60 बच्चे हर साल ऐसा पैदा होते हैं जिन्हें ये बीमारी होती है।

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