भाई द्वारा दुष्कर्म का शिकार हुई थी 14 वर्षीय बहन, अब देना होगा बच्चे को जन्म

rape,indore,14 years girl pregant

चैतन्य भारत न्यूज

अपने ही भाई द्वारा दुष्कर्म का शिकार हुई 14 वर्षीय किशोरी को अब बच्चे को जन्म देना होगा। हाई कोर्ट ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट देखकर उसे गर्भपात कराने की अनुमति नहीं दी है। दरअसल, पीड़िता का गर्भ 28 माह का हो चुका है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट के मुताबिक, 20 हफ्तों के गर्भ के बाद गर्भपात सिर्फ तभी किया जा सकता है जब मां या बच्चे की जान बचाने के लिए ऐसा करना जरुरी हो।

मामला इंदौर के भवरकुआं थाना क्षेत्र का है। यहां एक किशोरी अपने 16 वर्षीय भाई से दुष्कर्म का शिकार हुई थी। इसके बाद माता-पिता ने पीड़िता के गर्भपात के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी थी। पीड़िता तीन दिनों तक एम.वाय अस्पताल में भर्ती रही, जहां उसकी कई जांचे भी की गई। इसके बाद मंगलवार को कोर्ट में सभी जांच रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता का गर्भ 28 हफ्ते का हो चुका है, इसलिए उसकी जान को खतरा भी हो सकता है। ऐसे में माता-पिता ने अपनी बेटी की जान खतरे में डालने से इंकार कर दिया। पीड़िता को बाल कल्याण समिति ने आश्रय गृह में संरक्षण दिलाया है। डिलीवरी होने तक वह यहीं पर रहेगी। हालांकि, बच्चे को परिवार पालेगा या उसे समिति को सौंपा जाएगा इसका निर्णय परिवार द्वारा लिया जाएगा।

आरोपित भाई को गिरफ्तार किया जा चुका है। पीड़िता की मां ने कहा कि, ‘हमारा तो घर ही बर्बाद हो गया है। बेटा जेल चला गया और बेटी को संस्था में रखा गया है। समाज और रिश्तेदारों की आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है।’

टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट के तहत गर्भपात इन स्थितियों में कराया जा सकता है-

– अगर बलात्कार की वजह से कोई गर्भवती हो।
– गर्भवती स्त्री की जान को खतरा हो।
– गर्भनिरोधक उपाय फेल हो जाने पर।
– होने वाले बच्चे को किसी भी प्रकार की मानसिक बीमारी होने पर।

ये भी पढ़े… 

इंदौर के एमवाय अस्पताल में योग, मंत्र व हवन से किया जाएगा गर्भवती महिलाओं का इलाज

अब आपके झुमके, अंगूठी और नेकलेस करेंगे गर्भनिरोधक का काम

एक ही स्कूल की 7 टीचर्स एक-साथ हो गई प्रेग्नेंट, हैरान हुए प्रिंसिपल

Related posts