यहां 180 साल से विराजमान है भगवान धन्वंतरि, पूजा करने से दूर होते हैं रोग

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चैतन्य भारत न्यूज

इंदौर. इस साल धनतेरस 25 अक्टूबर यानी शुक्रवार को है। धनतेरस आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि का अवतरण दिवस है। भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य और आरोग्य देवता माना जाता है। धन्वंतरि का उल्लेख महाभारत एवं पुराणों में भी मिलता है। पुराणों में बताया गया है कि समुद्र मंथन के बाद भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश धारण किए हुए निकले थे। आज हम आपको मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के राजवाड़ा के पास आडा बाजार में स्थित भगवान धन्वंतरि के मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां धनतेरस के दिन हजारों श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है।



धन्वंतरि मंदिर का इतिहास

भगवान धन्वंतरि का ये मंदिर करीब 180 साल पुराना है जहां धनतेरस पर बड़ी संख्या में इंदौर के अधिकतर वैद्य और अन्य लोग दर्शन के लिए सुबह से आना शुरू हो जाते हैं। देर रात तक यहां भक्तों का आना लगा रहता है। मान्यता है कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से लोगों को स्वास्थ्य लाभ होता है। यहां पर गंभीर बीमारी वाले भक्त भी आते हैं और पूजन करते हैं। पूजन करने से स्वास्थ्य लाभ होता है और आरोग्य देह प्राप्त होता है। कई वैद्य दवाइयां और जड़ी-बूटी लेकर आते हैं। वे भगवान के समक्ष इन्हें रखते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से दवाइयां व जड़ी-बूटी सिद्ध होती हैं।

मंदिर का निर्माण

कहा जाता है कि राज्य वैद्य पं. लक्ष्मीनारायण त्रिवेदी ने इस मंदिर की स्थापना की थी। यहां भगवान धन्वंतरि की मूर्ति तीन फीट ऊंची है। जयपुर के मार्बल से इस मूर्ति का निर्माण किया गया है। आड़ा बाजार स्थित मंदिर में नीचे राधा-कृष्ण का मंदिर है, जबकि पहली मंजिल पर भगवान धन्वंतरि विराजमान हैं। हर साल इस मंदिर में धनतेरस को विशेष पूजा अर्चना के साथ ही हवन भी किया जाता है। भगवान धन्वंतरि का पंचामृत, जड़ी-बूटियों से अभिषेक किया जाता है।

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