फिल्म देखकर स्पाइडर मैन बनने की चाह में 3 भाइयों ने खुद को मकड़ी से कटवाया, हुआ बेहद खतरनाक हाल

bolivia spider man

चैतन्य भारत न्यूज

बच्चे किसी भी चीज को देखकर बहुत जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। खासतौर से फिल्मों या टीवी शोज में दिखाए जाने वाले दृश्यों को देखकर वह भी उन्हें दोहराने की कोशिश करते हैं। लेकिन कई बार ऐसे सीन्स दोहराना खतरनाक साबित हो जाता है। कुछ ऐसा ही अब बोलिविया में हुआ जहां तीन भाई ‘स्पाइडर मैन’ फिल्म देखकर स्पाइडर मैन बनने की कोशिश करने लगे।

जानबूझकर खुद को मकड़ी से कटवाया

यहां 8, 10 और 12 साल के तीन भाइयों ने ‘स्पाइडर मैन’ फिल्म देखकर स्पाइडरमैन बनने के बारे में सोचा। उन्होंने जानबूझकर खुद को एक मकड़ी से कटवाया। आपको बता दें फिल्म में अभिनेता पीटर पार्कर (स्पाइडरमैन) को मकड़ी काटती है, जिसके बाद वह स्पाइडरमैन बन जाता है। फिल्म देखकर बच्चों को लगा कि वह भी सुपरहीरो बन जाएंगे।

मांसपेशियों में दर्द, पसीना, बुखार जैसी समस्याएं हुई

फिर तीनों भाइयों ने मिलकर सुपरहीरो बनने के लिए एक जहरीली काली मकड़ी को काटने के लिए उकसाया। उन्हें लग रहा था कि इससे वो भी स्पाइडरमैन के रूप में तब्दील हो जाएंगे। जिस समय बच्चे मकड़ी को उकसा रहे थे उस वक्त उनकी मां लकड़ी इक्कठा करने के लिए घर से बाहर गई हुई थीं। मकड़ी से खुद को कटवाने के बाद तीनों भाइयों ने मिलकर उसे मार दिया। लेकिन मकड़ी के जहर से तीनों ही मांसपेशियों में दर्द, पसीना, बुखार और कंपकंपी से बुरी तरह पीड़ित हो गए।

इलाज के बाद भी सुधार नहीं हुआ

जब लकड़ी लेकर मां घर पहुंची तो उन्होंने अपने तीनों बेटों को दर्द से रोता हुआ देखा। फिर महिला तुरंत तीनों बच्चों को पास के स्वास्थ्य केंद्र पहुंची लेकिन दवा दिए जाने के बाद भी उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। फिर उन्हें लालागलगुआ के एक अस्पताल में भर्ती किया गया लेकिन वहां भी उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ।

मकड़ी काटने का सीरम दिया

फिर तीनों बच्चों को शहर के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां उन्हें विषैले मकड़ी के काटने के लिए सीरम दिया। इसके बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ। पांच दिनों तक इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बोलिविया के स्वास्थ्य मंत्रालय के महामारी विज्ञान के प्रमुख, वर्जिलियो पिएत्रो ने इस बारे में कहा कि, ‘बच्चों के लिए सब कुछ वास्तविक है, फिल्में वास्तविक हैं, सपने वास्तविक हो सकते हैं, लेकिन वे (बच्चे) हमारे जीवन की आशा हैं।’

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