भोपाल गैस त्रासदी : बेहद डरावनी रात और चीखती सुबह, जानें उस दर्दना‍क हादसे से जुड़ी कहानी

bhopal gas tragedy

चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई गैस त्रासदी दुनिया के औद्योगिक इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी भयावह और दर्दनाक त्रासदी में से एक है। 35 बरस पहले 1984 में 3 दिंसबर की उस रात मौत ने हजारों लोगों को दबे पांव अपने आगोश में ले लिया। भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड के कारखाने से जहरीली गैस रिसाव से समूचे शहर में मौत का तांडव मच गया। आज भी दिलों को दहलाने वाले इस हादसे से जुड़ी अहम बातें आप भी जानिए-


25000 से ज्यादा लोग मारे गए

3 दिसंबर 1984 को भोपाल में हुई इस भयानक औद्योगिक दुर्घटना को ‘भोपाल गैस कांड’ या ‘भोपाल गैस त्रासदी’ के नाम से जाना गया। भोपाल स्थित ‘यूनियन कार्बाइड’ नामक कंपनी के कारखाने के प्लांट नंबर ‘C’ से ‘मिथाइल आइसो साइनाइट’ (मिक) नामक एक जहरीली गैस का रिसाव हुआ, जिससे कीटनाशक बनाया जाता है। यह जहरीली गैस हवा के झोंके के साथ बहने लगी और लोगों को मौत की नींद सुलाने लगी। गैस के कारण लोगों की आंखों और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस गैस के रिसाव से लगभग 25000 से अधिक लोगों की जान गई तथा बहुत सारे लोग अनेक तरह की शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के शिकार हुए। जिन लोगों के फैंफड़ों में बहुत गैस पहुंच गई थी वे सुबह देखने के लिए जीवित नहीं रहे।

क्यों हुआ था रिसाव? 

जानकार सूत्रों के मुताबिक, कार्बाइड फैक्टरी से करीब 40 टन गैस का रिसाव हुआ था और इसका कारण यह था कि फैक्टरी के टैंक नंबर 610 में जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस से पानी मिल गया था। इस घटना के बाद रासायनिक प्रक्रिया हुई और इसके परिणामस्वरूप टैंक में दबाव बना। अंतत: टैंक खुल गया और गैस वायुमंडल में फैल गई। गैस के सबसे ज्यादा शिकार कारखाने के पास बनी झुग्गी बस्ती के लोग ही हुए थे। ये सभी वे लोग थे जो कि रोजीरोटी की तलाश में दूर-दूर के गांवों से आकर यहां पर रह रहे थे। त्रासदी के बाद भोपाल में जिन बच्चों ने जन्म लिया उनमें से कई विकलांग पैदा हुए तो कई किसी और बीमारी के साथ इस दुनिया में आए।

भारत छोड़कर भाग गया कंपनी का मुख्य अधिकारी

इस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड के मुख्य प्रबंध अधिकारी वॉरेन एंडरसन रातोंरात भारत छोड़कर अपने देश अमेरिका रवाना हो गए थे। 7 जून, 2010 को आए स्थानीय अदालत के फैसले में आरोपियों को दो-दो साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन सभी आरोपी जमानत पर रिहा भी कर दिए गए। वॉरेन एंडरसन की मौत 29 सिंतबर 2014 को हुई थी। इस हादसे पर 2014 में फिल्म ‘भोपाल ए प्रेयर ऑफ रेन’ का निर्माण किया गया।

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