40 मिनट में देख सकेंगे 90 साल का स्वतंत्रता आंदोलन

इलाहाबाद राष्ट्रीय संग्रहालय में आजाद गैलरी (वीथिका), संगमनगरी को ऐसी सौगात के रूप में मिलने जा रही है जिस पर देश नाज करेगा। ध्वनि और चित्रों के माध्यम से इसमें लोग 40 मिनट में 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत से 1947 में देश को मिली आजादी तक के इतिहास को देख सकेंगे। शहीद चंद्रशेखर आजाद और सरदार भगत सिंह ही नहीं, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन में अपनी जान कुर्बान कर देने वाले अनेक गुमनाम क्रांतिकारियों की गाथा भी रहेगी। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो अगले स्वतंत्रता दिवस तक इसका संचालन शुरू हो जाएगा।

संग्रहालय में आजाद गैलरी का निर्माण नेशनल काउंसिल आफ साइंस म्यूजियम (एनसीएएम) कर रहा है। सेंट्रल हाल में प्रदर्शित चंद्रशेखर आजाद की पिस्टल बम्तुल बुखारा के समीप से इस गैलरी की शुरुआत होगी और भीतर कक्ष तक कुल 600 स्क्वायर फिट यार्ड में इसे बनाया जाएगा। इलाहाबाद विश्‍वविद्याल और बीएचयू के इतिहासकारों और इलाहाबाद राष्ट्रीय संग्रहालय से अनुसंधान के आधार पर मिले ऐतिहासिक तथ्यों और दुर्लभ चित्रों को एनसीएसएम ध्वनि व चित्रों को समाहित कर फिल्म का स्वरूप देगा और अलग-अलग स्क्रीन पर इसका प्रदर्शन किया जाएगा।

संग्रहालय में आजाद गैलरी बनाने का कंसेप्ट 2018 में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के तत्कालीन अतिरिक्त सचिव अरुण गोयल का है। उन्होंने इस कंसेप्ट को स्वीकृत कराने के साथ ही चार करोड़ रुपये की धनराशि भी दिला दी थी ताकि काम शुरू हो सके। संग्रहालय प्रशासन के अनुसार प्रोजेक्ट पर कुल 10 करोड़ रुपये खर्च आ रहा है जिसमें अब तक करीब सवा करोड़ रुपये व्यय हो चुके हैं।

आजाद गैलरी में क्रांतिकारी अनेक बड़े घटनाक्रम को प्रदर्शित किया जाएगा जिसमें काकोरी ट्रेन रिबोल्ट, सांडर्स हत्याकांड, आजाद की शहादत, क्रांतिकारियों को जेल में दी जाने वाली यातनाएं और सड़क पर सामूहिक रूप से आंदोलन के दौरान देशवासियों के जज्बे को दिखाया जाएगा। इसमें शहीद चंद्रशेखर आजाद के आंदोलनात्मक रुख और उनकी शहादत को तो केंद्र में रखा जाएगा, सरदार भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त, अशफाकउल्ला खान, शहीद रोशन सिंह के अलावा कई अन्य गुमनाम शहीदों की गाथा भी दिखाई जाएगी।

संग्रहालय की आजाद गैलरी विश्वस्तरीय होगी। क्योंकि विदेश के तमाम बड़े संग्रहालयों में भी ऐसी गैलरी एक या दो ही होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि आजाद गैलरी देख लोगों को अपने देश के उन क्रांतिकारियों पर बेहद गर्व होगा जिनकी कुर्बानियों की बदौलत आप और हम आजादी से घूम रहे हैं और खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं।

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में मध्य कालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के प्रोफेसर (सेवानिवृत्त) और संग्रहालय समिति के सदस्य प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी कहते हैं कि यह गैलरी आजादी के बाद आजाद के सम्मान स्वरूप होगी। कहा कि इस देश में हजारों आजाद हैं जिन्हें इतिहास को गलत ढंग से पेश करने वालों ने कभी तवज्जो ही नहीं दी। यह गैलरी उन्हीं क्रांति के गुमनाम योद्धाओं को भी सम्मान स्वरूप होगी।

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