टीवी-मोबाइल की गिरफ्त में 80% बच्चों को मोटापा, हो रहे फैटी लिवर जैसी कई गंभीर बीमारियों के शिकार

kids using mobile

चैतन्य भारत न्यूज

इन दिनों बच्चे खेलकूद छोड़ अधिकतर समय मोबाइल और टीवी पर बिता रहे हैं, जिससे इनमें से 80 फीसदी बच्चों में गंभीर बीमारियों के लक्षण देखे गए। यह जानकारी वर्ल्ड ओबेसिटी डे पर जारी एक रिपोर्ट में सामने आए हैं।



करीब 300 बच्चों पर यह स्टडी की गई जिसकी रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना करीब 80 फीसदी बच्चे औसतन 3 घंटे टीवी पर और एक घंटा मोबाइल चलाने में बिता रहे हैं। इनमें से 70 फीसदी ऐसे बच्चे हैं जो किसी भी शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेते हैं। उनका पूरा समय स्कूल, कोचिंग, होमवर्क, टीवी देखने और मोबाइल चलाने में ही चला जाता है। स्टडी में यह भी सामने आया कि 81 फीसदी बच्चे टीवी देखते हुए खाना पसंद करते हैं। इनमें से 80 फीसदी बच्चे एक हफ्ते में कम से कम तीन बार या फिर उससे ज्यादा जंक फूड खाते हैं। इस स्टडी में बच्चों में कसरत का अभाव मुख्य रूप से सामने आया है।

विशेषज्ञों की माने तो मोटापा सिर्फ आलस, गलत दिनचर्या और खान-पान की वजह से नहीं होता है, बल्कि इसके पीछे और भी कई कारण होते हैं। इसका एक बड़ा कारण जेनेटिक प्रॉब्लम भी है। जो अभिभावक मोटे होते हैं, उनमें से अधिकतर के बच्चे भी मोटे होते हैं। ऐसे में अभिभावकों को भी अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरुरत होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल करीब 28 लाख लोग मोटापे और इससे होने वाली बीमारियों के कारण अपनी जान गवां देते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, 80 फीसदी मोटे लोगों में फैटी लिवर होना सामान्य बात है। इसकी शुरुआती अवस्था को मेडिकल की भाषा में नैश यानी ‘नॉन अल्कोहॉलिक स्टीटो हैपेटाइटिस’ कहा जाता है। इसमें लिवर की इकट्ठी हुई चर्बी उसकी कोशिकाओं को तोड़ने की कोशिश करती है। इस वजह से 15 से 20 साल बाद सिरोसिस होने की संभावना भी बढ़ जाती है। जिन बच्चों पर यह स्टडी की गई, उनमें से 20 से 22 प्रतिशत बच्चों को 11 से 12 साल की उम्र में ही लिवर फेल्योर जैसी गंभीर बीमारी होने की संभावना अधिक थी।

क्या है इससे बचाव

  • रोजाना कसरत करें।
  • बच्चे रोजाना शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लें, दौड़ना-भागना करें।
  • नियम बनाए कि जंक फूड 15 दिन में एक बार ही खाएं।
  • जितना हो सके उनसे मोबाइल दूर रखे और टीवी देखने का भी समय निश्चित कर दें।
  • खाने में पौष्टिक आहार लें।

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