80 साल के बुजुर्ग दंपती ने जीते नेशनल मिनी चैंपियनशिप में 6 मेडल

hisar, hariyana

चैतन्य भारत न्यूज

हिसार. कहते हैं ना कि सफलता, किसी की उम्र देखकर नहीं आती। अगर मन में कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो सफलता किसी भी उम्र में हासिल की जा सकती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है 80 साल के बुजुर्ग दंपती ने। जी हां… हिसार की अमरदीप कॉलोनी के रहने वाले बुजुर्ग दंपती सुंदर सिंह ढिल्लो व उनकी पत्नी हरप्यारी ने 80 साल की उम्र में वो काम कर दिखाया है, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। अधिक से अधिक पदक जीतने का लक्ष्य रखने वाला यह दंपती अब 250 से अधिक नेशनल व स्टेट लेवल खेल प्रतियोगिताओं में पदक हासिल कर चुका है।



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जीते गोल्ड मेडल

जानकारी के मुताबिक, राजस्थान के अलवर में 26 व 27 जून 2014 को हुई मास्टर्स (वेटर्न) एथलीट की नेशनल मिनी चैंपियनशिप में सुंदर सिंह ढिल्लो ने 3 किलोमीटर वाक मैराथन के गोल्ड समेत 2 गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीते। प्रतियोगिता में उनकी पत्नी हरप्यारी ढिल्लो उनसे थोड़ा आगे निकल गई और उन्होंने 100 मीटर, 200 मीटर दौड़ और 5 किलोमीटर वाक मैराथन में गोल्ड मेडल जीते।

बेटी ने किया प्रेरित

साल 1990 में सेना में सूबेदार पद से रिटायर्ड सुंदर सिंह की बेटी वैशाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की जूडो खिलाड़ी हैं। पिता को कई सालों तक घर पर ही बैठा देख उन्होंने एक दिन अनायास यह कह दिया कि पापा, आप खिलाड़ी बेटी के पिता हैं। सेना से रिटायर्ड सैनिक हैं। आपको दिनभर घर में यूं बैठे रहना शोभा नहीं देता।

बेटी की बात सुंदर सिंह के दिल में बैठ गई। उन्होंने अगले दिन से ही पार्क में दौड़ लगाने के लिए जाना शुरू कर दिया। खबरों के मुताबिक, साल 2002 में पहली बार भिवानी में आयोजित मास्टर्स एथलेटिक्स मीट में हिस्सा लिया और लॉंग जंप, 200 व 100 मीटर रेस में रजत पदक जीते। इस दौड़ ने उनके जीवन में सपने भर दिए। इसके बाद दंपति ने अधिक-अधिक से पदक जीतने का लक्ष्य बनाया।

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लोग मारते थे ताने

हरप्यारी का कहना कि पार्क में मुझे दौड़ता देख लोग मुझ पर हंसते थे और कमेंट करते थे कि बुढ़ापे में दौड़कर क्या ओलंपिक जीतना है। शर्म की वजह से उन्होंने सुबह व शाम अंधेरे में दौड़ना शुरू किया। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने लोगों की परवाह करना छोड़ खुद के बारे में सोचा। जब वो पदक जीतकर आई तो लोगों ने उन्हें ताने मारने की बजाए सम्मानित किया, जिससे उनका हौंसला और भी बढ़ा। हौसला इस कदर बुलंद है कि दोनों सुबह चार बजे पार्क में पहुंच जाते हैं और 10 से 12 किलोमीटर पैदल चलते हैैं और दौड़ लगाते हैं। हिसार (हरियाणा) में रहने वाले सुंदर सिंह बताते हैं कि वे टहलने और दौड़ने का अभ्यास कभी बंद नहीं करते। यह नियम साल 2002 से बनाया हुआ है।

दंपति की सेहत का राज

सुबह : जल्दी उठकर एक गिलास पानी। नियमित व्यायाम। क्षमतानुसार चलना और दौड़ना। स्नान के बाद नाश्ते में दूध और गोंद के दो लड्डू।

दोपहर : भोजन में तीन रोटी, दाल, सब्जी और दही।

शाम : पेटभर कर ज्यादा दूध वाली खीर।

रात : हल्का-फुल्का भोजन। समय पर सोना।

सुंदर की उपलब्धियां

  • 2014 में अलवर मेंनेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीते।
  • 2015 में लखनऊ में नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो गोल्ड व एक सिल्वर मेडल जीता।
  • 2016 में विदिशा में नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीते।

हरप्यारी की उपलब्धियां

  • 2016 में अलवर में नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो गोल्ड व एक सिल्वर मेडल जीता।
  • 2015 में रोहतक में नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीते।
  • 2014 पंचकूला में नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो सिल्वर व एक गोल्ड जीता।

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