सर्वाइकल कैंसरः इस घातक रोग से बचा सकती है जागरूकता

cervical cancer

चैतन्य भारत न्यूज

भारतीय महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर भी बहुतायत में पाया जाता है। पूरे विश्व में सर्वाइकल कैंसर से मरने वालों में से एक चौथाई महिलाएं भारत की होती हैं। जननांगों से संबंधित इस कैंसर के बारे में जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। कैंसर से संबंधित कुल मौतों का 11.1 प्रतिशत कारण सर्वाइकल कैंसर ही है। यह स्थिति और भी खराब इसलिए हो जाती है क्योंकि देश में मात्र 3.1 प्रतिशत महिलाओं की ही इस स्थिति में जांच हो पाती है। बाकी महिलाएं इसके खतरे में ही जीती हैं।

नाम से ही स्पष्ट है कि यह सर्विक्स में होने वाला कैंसर है। महिलाओं के गर्भाशय के निचले हिस्से में सर्विक्स पाया जाता है। इसे द नेक ऑफ वुम्ब यानी गर्भाशय या यूटेरस की गर्दन  या गर्भाशय ग्रीवा भी कहते हैं। सर्विक्स योनि के ऊपरी हिस्से तक फैला हुआ शरीर का हिस्सा होता है। यहां पर होने वाले कैंसर को सर्वाइकल कैंसर कहा जाता है।

लक्षण

सर्वाइकल कैंसर का पता सामान्य तौर पर योनि से होने वाले रक्तस्राव या ब्लीडिंग से चलता है। वास्तव में सर्वाइकल कैंसर एक दिन में नहीं होता है। सामान्य तौर पर एचपीवी इंफेक्शन यानी ह्यूमन पैपीलोमा वायरस के कारण शरीर में कोशिकाएं या सेल्स असामान्य हो जाते हैं। विभिन्न स्तरों से गुजर कर ये कोशिकाएं बाद में कैंसर सेल्स में बदल जाती हैं। शुरुआती चरण में असामान्य कोशिकाएं या सेल्स कैंसर कोशिकाएं नहीं होती हैं और न ही इनसे किसी बीमारी के लक्षण की जानकारी मिलती है।

इलाज

सर्वाइकल कैंसर के इलाज के कुछ विकल्प भारत में उपलब्ध हैं- जैसे सर्जरी, रेडियोथैरेपी, कीमोथैरेपी आदि। इलाज का कौनसा विकल्प रोगी के लिए उपयुक्त हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर किस चरण या स्टेज तक पहुंच चुका है।

पेप स्मियर टेस्ट

सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए पेप स्मियर टेस्ट करवाया जाता है। सभी सेक्सुअली एक्टिव महिलाएं यानी सेक्स करने वाली महिलाएं जिनकी उम्पर 24 से 64 साल के बीच है। उन्हें पेप स्मियर टेस्ट नियमित रूप से एक निश्चित अंतराल में करवाते रहना चाहिए। 24 से 50 साल की महिलाओं को यह टेस्ट हर तीन साल के अंतर में करवाना चाहिए जबकि 50 से 64 साल की महिलाओं को हर पांच साल में इसे करना चाहिए। ऐसा कई बार सुनने में आता है कि सर्वाइकल कैंसर के कारण गर्भधारण कठिन हो जाता है। सर्वाइकल कैंसर फर्टिलिटी को प्रभावित नहीं करता है। हां, यदि इस बीमारी से पीड़ित महिला ने रेडियोथैरेपी करवाई हो तो यह संभव है कि उसका गर्भधारण मुश्किल हो जाए। यदि इलाज के दौरान गर्भाशय ही निकाल दिया गया हो तो गर्भधारण का प्रश्न ही नहीं उठता।

सावधानियां

भारतीय महिलाएं अकसर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाते-निभाते अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को अनदेखा करती हैं। हर तरह से स्वस्थ रहने के लिए जागरूक होना जरूरी है। यदि इस बीमारी का पता शुरुआती दौर में ही लग जाए तो आसानी से इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। नियमित रूप से मेडिकल जांच करवाएं। यह हमेशा याद रखें कि आपका अच्छा स्वास्थ्य आपके हाथों में है। इनसे बचाव के लिए-

  • सेक्स पार्टनर की संख्या कम हो। कंडोम के बिना कई व्यक्तियों के साथ यौन संपर्क से बचना जरूरी है।
  • ध्रूमपान न किया जाए। सिगरेट व बीड़ी पीने से निकोटिन और अन्य घटक रक्त में आ जाते हैं। ये सर्विक्स में जमा होते हैं। सर्विक्स सेल्स के विकास में बाधक बनते हैं। धूम्रपान प्रतिरक्षा तंत्र को भी प्रभावित करता है।
  • सही उम्र में गर्भधारण किया जाए।
  • बच्चों की संख्या अधिक न हो।
  • जांच में झिझकें नहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में कैंसर से मरने वाली महिलाओं में चौथा सबसे बड़ा कारण सर्वाइकल कैंसर है। एक अध्ययन में पता चला है कि एक तिहाई महिलाएं जांच के दौरान यौन अंगों को दिखाने में झिझकती और शरमाती हैं इसलिए वे जांच से बचती हैं और फिर शुरुआती अवस्था में यह बीमारी पता नहीं चल पाती।
(कई विशेषज्ञों से बातचीत पर आधारित)

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