चाय का महात्मय

चैतन्य भारत न्युज 

डॉ. अखलेश भार्गव, लेखक एवं चिकित्सक 
(यह लेख सिर्फ मनोविनोद का विषय है, किसी विशेष महत्व के रूप में इसको न लिया जाए)
प्राचीन समय से ही अनेक प्रकार के पेय पदार्थों का वर्णन होता रहा,जो शरीर तो मन के लिए तृप्ति का कारण रहे है । प्राचीन शास्त्रों में पेय पदार्थ के रूप में प्रयोग में लिए जाने वाले द्रव्यों का मुख्य रूप से शरीर की बीमारियों को दूर करने अथवा विभिन्न प्रकार के मौसम में शरीर को किस प्रकार सुखी रखा जा सके इस रूप में प्रयोग में हुआ है । किंतु कालांतर में आधुनिक वाद एवं पाश्चात्य वाद के आते-आते इन पेय पदार्थों में मुख्य रूप से चाय शब्द का प्रयोग एवं उपयोग तेजी से चलन में आया है और धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है ।

चाय शब्द एक सामान्य शब्द है सभी प्रकार के धर्मों में, अमीर में, गरीब में ,सभी राज्यों में, कश्मीर से कन्याकुमारी तक अलग-अलग नामों से प्रचलित, पुरुष, स्त्री ,बच्चे ,छात्र ,बड़े-बड़े इंस्टिट्यूट, सरकारी कार्यालय, छोटी छोटी गुमटी ,छोटी-छोटी दुकानें हर जगह यह शब्द और उसका प्रयोग आसानी से मिल सकता है । परंतु यह इसमें एक विशेषता भी है, कि यह सामान्य होते हुए सभी लोगों को आपस में जोड़ने का विशेष माध्यम रखता है। बड़े से बड़ा काम इसके माध्यम से होता देखा गया है । जिस प्रकार कुछ चीजें समाज में एकता लाने का कार्य करती हैं, उनमें चाय भी एक बहुत महत्वपूर्ण स्रोत है । चाय अनेक प्रकार के अलग-अलग विचार वाले व्यक्तियों को एक मंच पर लाने का कार्य करती है और निश्चित रूप से जब लोग साथ में बैठेंगे तो विचारों का आदान-प्रदान होगा । क्योंकि इस पेय पदार्थ के लिए कोई विशेष प्लानिंग की आवश्यकता नहीं है बस “चाय पीने चलें” इतना कहने पर संगोष्ठी हो जाती है । इसके लिए उपलब्धता भी कोई विशेष मायने नहीं रखती , कदम कदम पर ही उपलब्ध है । बड़ी-बड़ी पार्टियों में, छोटी-छोटी दुकानों पर , छोटे-छोटे अवसरों पर भी उपलब्ध है । चाय की पार्टी देने के लिए कोई विशेष साधन सुविधा संपन्न होने की आवश्यकता नहीं है , कोई भी व्यक्ति कभी भी इसकी पार्टी दे सकता है और पार्टी देने के सुख का अनुभव कर सकता है। क्योंकि पार्टी तो पार्टी है । क्योंकि इसमें जो अपनापन है वह और कहीं नहीं इसकी मांग और आपूर्ति का नियम बहुत महत्वपूर्ण है , बड़े से बड़े फाइव स्टार होटल में और छोटी से छोटी गली की थड़ी में भी इसकी मांग है , इसलिए यह रोजगार के अवसर भी प्रदान करती है क्योंकि इस व्यापार को शुरू करने के लिए बहुत ही अल्प संसाधन की आवश्यकता है और इसके ग्राहक भी बनाने नहीं पढते ,और ना ही ग्राहकों का इंतजार करना पड़ता है । चाय पीना एक आकस्मिक दुर्घटना है जो कहीं भी हो सकती है , 1 मिनट पहले भी इसका पता नहीं होता कि अगले मिनट कब कोई अपना मिल जाए और कब चाय पीनी पड़ जाए। घर-घर में इसकी अंदर तक पहुंच है । ऐसा अक्सर देखा गया है कि कुछ लोगों को अगर सुबह बिस्तर से उठने के साथ यह नहीं मिले तो उनका दिन खराब हो जाता है ।शरीर की क्रियाएं उलझी हुई लगती हैं ।चाय के विश्वास पर बड़े बड़े कार्यक्रम आयोजित हो जाते हैं ।जब भी किसी व्यक्ति के पास बहुत अधिक काम हो या बिल्कुल ही फ्री हो, तो मन मस्तिष्क पटल पर सबसे पहले चाय का ही स्मरण होता है “चलो चाय पी ले” क्योंकि काम नहीं करना भी यह काम नहीं होना भी एक बहुत बड़ा काम है और इस काम से विश्राम लेने के लिए चाय बहुत महत्वपूर्ण है । यह चाय अलग-अलग स्थानों पर बड़े-बड़े फाइव स्टार होटल एवं छोटी छोटी दो बाय दो की या ठेले पर लगने वाली दुकानों पर इसकी कीमत अलग-अलग है किंतु इसका मजा लेने वाले पर ही निर्भर करता है, यह मजा आना भी एक विचित्र चीज है , कभी-कभी यह मजा बड़े-बड़े होटलों में चाय पीने में नहीं आता तो कभी-कभी कुछ मित्रों के साथ थडी पर बैठ कर चाय पीने में आ जाता है । दुश्मनों को दोस्त बनाने में या अलग-अलग मत मतांतर को सर्वमान्य मनाने में चाय एक महत्वपूर्ण स्रोत है । इस चाय के कारण ही लोगों मैं मेल मिलाप बढ़ता है । घरों में आने वाले मेहमानों के लिए चाय एक सामान्य लिए जाने वाला पदार्थ है, इसे पिलाने के लिए कोई विशेष आग्रह नहीं करना पड़ता और बड़े सस्ते में यह काम हो जाता है । मेहमानों को चाय पिलाना हमारी सांस्कृतिक धरोहर है , क्योंकि चिकित्सा के क्षेत्र में गरम पेय पदार्थों का शरीर के लिए विशेष महत्व है और जाने अनजाने में हम सभी लोग कि चाय को पीकर कुछ लाभ तो ले ही रहे हैं , बस मुद्दे की बात यह है कि इस चाय में मिलाए जाने वाले पदार्थों को एक तरफ रख कर यदि शरीर के लिए आवश्यक जड़ी बूटियों को इसके साथ प्रयोग में लिया जाए तो इस शरीर के लिए निश्चित रूप से लाभदायक होगी। छात्र जीवन में इसका बड़ा महत्वपूर्ण प्रयोग है, सीनियर्स के द्वारा दिए जाने वाले गूढ रहस्य जो जीवन में आज महत्वपूर्ण हैं, वही चाय पर ही प्राप्त होते रहे हैं । अनेक महत्वपूर्ण मीटिंग का स्थान चाय की दुकान ही रहा है । चाय की दुकान वाला ही ऐसा बलिदानी व्यक्ति रहा है जो घंटों घंटे अपने ग्राहकों को बिठा के रखता है और तनिक भी संकोच नहीं करता और ग्राहक भी कितने भी हो आपस में एडजस्ट हो जाते हैं यह चाय का ही प्रभाव है।।।॰।।। *

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