जानिए कौन हैं जस्टिस पुष्पा वीरेंद्र, जिन्होंने यौन अपराध को लेकर दिए बैक-टू-बैक विवादित फैसले

चैतन्य भारत न्यूज

बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस पुष्पा वीरेंद्र गनेडीवाला पिछले कुछ दिनों से अपने कुछ विवादित फैसलों को लेकर चर्चा में हैं। उनके द्वारा लिए गए इन फैसलों के कारण जस्टिस पुष्पा का प्रमोशन तक रोक दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने जस्टिस पुष्पा वीरेंद्र को स्थाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद अब वापस ले लिया है। जानकारी के अनुसार पॉक्सो ऐक्ट वाले मामले में जस्टिस पुष्पा के फैसले के व्याख्यान के बाद यह कदम उठाया गया है।

इन दो फैसलों पर आज तक छिड़ी हुई है बहस

15 जनवरी के फैसले में, जस्टिस पुष्पा गनेदीवाला ने फैसला सुनाया था कि कोर्ट के विचार में नाबालिग का हाथ पकड़ना और उसके सामन पैंट उतारना यौन शोषण की परिभाषा में फिट नहीं बैठता। हालांकि उन्होंने लिब्रस कुजूर नाम के व्यक्ति को आरोपी बनाए रखा, क्योंकि बच्चे की उम्र 12 साल से कम थी। इसके अलावा बच्चियों से छेड़छाड़ के एक मामले में सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘नो स्किन टच, नो सेक्सुअल असॉल्ट’ का फैसला सुनाया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यौन हमले (Sexual Assault) का कृत्य माने जाने के लिए ‘यौन मंशा से त्वचा से त्वचा का संपर्क होना’ जरूरी है। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि महज छूना भर यौन हमले की परिभाषा में नहीं आता है।

नाबालिग पीड़िता के स्तन को स्पर्श करना यौन अपराध नहीं

इसका मतलब था कि त्वचा से त्वचा का संपर्क हुए बिना नाबालिग पीड़िता के स्तन को स्पर्श करना यौन अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले को पॉक्सो एक्ट के तहत मानने से इनकार कर दिया था। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने हाईकोर्ट के 19 जनवरी के फैसले को गंभीरता से लिया है। महिला आयोग ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

कौन हैं पुष्पा वीरेंद्र गनेडीवाला?

1969 में महाराष्ट्र के अमरावती जिले में जन्मीं पुष्पा गनेडीवाला ने बी. कॉम, एलएलबी और फिर एलएलएम की पढ़ाई की है। वो 2007 में डिस्ट्रिक्ट जज अपॉइंट हुई थीं। वो मुंबई सिविल कोर्ट और नागपुर की डस्ट्रिक्ट और फैमिली कोर्ट में रहीं। फिर बाद में वो बॉम्बे हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल रहीं। 2019 में वो बॉम्बे हाईकोर्ट में अडिशनल जज बनीं।

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