विश्व ब्रेल दिवस: लुई ब्रेल ने सिखाया दृष्टिहीनों को पढ़ने का हुनर, 15 साल की उम्र में बना दी ब्रेल लिपि

world braille day

चैतन्य भारत न्यूज

दुनियाभर में 4 जनवरी का दिन ‘विश्व ब्रेल दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन लुई ब्रेल का जन्मदिन भी होता है। बता दें लुई ब्रेल वहीं शख्स हैं जिन्होंने महज 15 साल की उम्र में ब्रेल लिपि का आविष्कार किया था।

खुद दृष्टिहीन थे लुई ब्रेल

लुई ब्रेल का जन्म 4 जनवरी, 1809 को फ्रांस में हुआ था। उनके पिता साइमन रेले ब्रेल शाही घोड़ों के लिए काठी बनाने का काम करते थे। एक बार अपने पिता के औजारों से खेल रहे लुई के आंख में एक औजार लग गया। फिर उनकी आंख से खून निकलने लगा। वक्त बीतने के साथ-साथ उनका घाव बढ़ता गया और 8 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लुइस पूरी तरीके से दृष्टिहीन हो गए। इसके बाद उन्होंने ये अद्भुत खोज की। ब्रेल लिपि के आविष्कार के बाद दुनियाभर में नेत्रहीन, दृष्टिहीन या आंशिक रूप से नेत्रहीन लोगों की जिंदगी काफी हद तक आसान हो गई। इसके जरिए ऐसे लोग अपने पैरों पर खड़े हो सके।

ऐसे आया ब्रेल लिपि बनाने का विचार

बता दें कि ब्रेल एक तरह का कोड है। लुई के दिमाग में ब्रेल लिपि का विचार फ्रांस की सेना के कैप्टन चार्ल्र्स बार्बियर से मुलाकात के बाद आया। दरअसल, चार्ल्स ने सैनिकों की अंधेरे में पढ़ी जाने वाली नाइट राइटिंग और सोनोग्राफी के बारे में लुई को बताया था। ये लिपि कागज पर उभरी हुई होती थी और 12 प्वाइंट्स पर आधारित थी। इसी को आधार बनाकर लुई ने उसमें संशोधन कर उस लिपि को 6 बिंदुओं में तब्दील कर ब्रेल लिपि का आविष्कार कर दिया। लुई ने लिपि को कारगार बनाने के लिए विराम चिन्ह और संगीत के नोटेशन लिखने के लिए भी जरूरी चिन्हों का लिपि में जोड़ा।

मौत के 100 साल बाद मिला राजकीय सम्मान

बता दें साल 1851 में लुई को टी.बी. की बीमारी हो गई। इसके कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और फिर 6 जनवरी 1852 को महज 43 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। लुई के निधन के 16 वर्ष बाद 1868 में रॉयल इंस्टिट्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ ने इस लिपि को मान्यता दी। खास बात यह है कि लुई की मौत के 100 साल बाद फ्रांस सरकार ने उनके दफनाए गए शरीर को बाहर निकाला और फिर राष्ट्रीय ध्वज में लपेट कर पूरे राजकीय सम्मान से दोबारा दफनाया।

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