किस्सा कुछ यूं हैः समर्थन और बहुमत होने पर भी सोनिया गांधी ने ठुकरा दिया था पीएम बनने का प्रस्ताव, मनमोहन सिंह का नाम किया आगे

चैतन्य भारत न्यूज

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी फिर चर्चा में हैं। एक वरिष्ठ पत्रकार ने टीवी डिबेट में उन पर कथित अभद्र टिप्पणी कर उन्हें फिर चर्चाओं में ला दिया, लेकिन इटली मूल की सोनिया गांधी भारतीय राजनीति की एकमात्र ऐसी नेता हैं जिन्होंने भारत का प्रधानमंत्री बनने का मौका स्वीकार नहीं किया। अपनी ही पार्टी के डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे किया और वे लगातार दस साल तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। इसे समय की मांग कहिए या त्याग लेकिन यह राजनीति का ऐतिहासिक क्षण था। आइए सीरिज किस्सा कुछ यूं है..में जानते हैं सोनिया गांधी से जुड़े अनूठी कहानियां……

पूर्व राष्ट्रपति स्व. एपीजे अब्दुल कलाम के संस्मरणों की किताब ‘विंग्स ऑफ़ फ़ायर’ का दूसरा खंड ‘टर्निंग पॉइंट्स’ में सोनिया के प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करने की घटना का विस्तृत उल्लेख है। डॉ. कलाम ने इसमें लिखा है कि मई, 2004 में हुए आम चुनाव के नतीजों के बाद जब सोनिया गांधी उनसे मिलने आईं तो राष्ट्रपति भवन की ओर से उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किए जाने को लेकर चिट्ठी तैयार कर रख ली गई थी। डॉ. कलाम ने लिखा है कि 18, मई, 2004 को जब सोनिया गांधी अपने साथ मनमोहन सिंह को लेकर पहुंचीं तो उन्हें आश्चर्य हुआ। सोनिया गांधी ने मुझे कई दलों के समर्थन के पत्र दिखाए। इस पर मैंने (डॉ. कलाम) ने कहा कि यह स्वागत योग्य है और राष्ट्रपति उनकी सुविधा के समय पर शपथ ग्रहण करवाने के लिए तैयार है। इसके बाद सोनिया गांधी ने बताया कि वे मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के पद पर मनोनीत करना चाहेंगी। यह मेरे लिए आश्चर्य का विषय था और राष्ट्रपति भवन के सचिवालय को प्रधानमंत्री की नियुक्ति के पत्र फिर से तैयार करना पड़े। घटनाक्रम उस समय का है जब नवगठित गठबंधन यूपीए (यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलायंस) का नेतृत्व कर रही कांग्रेस के संसदीय दल ने सोनिया गांधी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुन लिया था। यूपीए को बाहर से समर्थन दे रहे वाममोर्चे ने भी कह दिया था कि उन्हें सोनिया गांधी के नाम पर आपत्ति नहीं है। सोनिया गांधी के नेतृत्व में यूपीए सबसे बड़े गठबंधन के तौर पर तो उभरा लेकिन बहुमत से काफी दूर रहा। कुल 543 सीटों में से यूपीए को 218 सीटें ही मिलीं जो सामान्य बहुमत के लिए जरूरी सीटों से 54 कम थीं। हालांकि, लेफ्ट फ्रंट (59), समाजवादी पार्टी (35) और बहुजन समाज पार्टी (19) के बाहर से समर्थन से इसकी भरपाई हो गई और डॉक्टर मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनी।

रेस्तरां में राजीव गांधी से मुलाकात ने बदला सोनिया का जीवन

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की पत्नी सोनिया का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली के एक छोटे से गांव लुसियाना में हुआ था। उनका शुरुआती नाम एंटोनियो माइनो है। बचपन में सोनिया इटली से कुछ दूरी पर स्थित ओर्बसानो में रही और बाद में वह इंग्लैंड चली गईं। इंग्लैंड में उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लैंग्वेज की पढ़ाई शुरू कर दी। सोनिया वहां एक रेस्तरां में वेट्रेस का काम किया करती थीं। इस दौरान उनकी नजर भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी पर पड़ी, जो 1965 में ट्रिनिटी कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। राजीव को पहली नजर में ही सोनिया से प्यार हो गया था।

राजीव ने नैपकिन पर लिखकर भेजी थी कविता

राजीव और सोनिया की कैंब्रिज की मुलाकातों का जिक्र मशहूर पत्रकार रशीद किदवई ने सोनिया पर लिखी जीवनी में भी किया है। उन्होंने बताया था कि वर्सिटी रेस्टोरेंट में रोज कैंब्रिज विश्वविद्यालय के छात्रों का जमावड़ा लगता था। वो सब बियर पिया करते थे। उनमें से राजीव अकेले थे जो बियर को हाथ भी नहीं लगाते थे। उस समय राजीव ने पहली बार एक नैपकिन पर उनके सोनिया के सौंदर्य पर एक कविता लिखकर वहां की सबसे महंगी वाइन के साथ वो सोनिया को भेज दी। सोनिया उस नैपकिन को पाकर थोड़ी असहज हुई थीं।

सोनिया को नहीं पता था किसके बेटे हैं राजीव

फिर धीरे-धीरे दोनों ने एक-दूसरे से मिलना शुरू किया और उनकी प्रेम कहानी आगे बढ़ती गई। दिलचस्प बात तो यह है कि राजीव ने आखिरी तक सोनिया को यह नहीं बताया कि वो भारत की प्रधानमंत्री के बेटे हैं। काफी समय बाद जब एक अखबार में इंदिरा गांधी की तस्वीर छपी। उस समय राजीव ने सोनिया से बताया कि ये उनकी मां की तस्वीर है। कैंब्रिज में पढ़ने वाले एक भारतीय छात्र ने सोनिया को बताया कि इंदिरा भारत की प्रधानमंत्री हैं। तब जाकर सोनिया को इस बात का अंदाजा लगा कि वह जिस शख्स से प्यार करती हैं वह कितना खास है। राजीव ने सिमी ग्रेवाल को दिए एक इंटरव्यू में कहा भी था कि, ‘मैं सोनिया को पहली बार देखकर ही समझ गया था कि यहीं वो लड़की है जो मेरे लिए बनी है। वो काफी मिलनसार है और कभी कुछ नहीं छुपाती।’ धीरे-धीरे सोनिया भी राजीव के प्यार में इतनी दीवानी हो गई थीं कि उन्होंने खत लिखकर अपने घर वालों को राजीव के बारे में बताया था। सोनिया ने खत में लिखा कि, ‘मैं एक भारतीय लड़के से प्यार करती हूं वो एक खिलाड़ी है। नीली आंखों वाले ऐसे ही राजकुमार का मुझे हमेशा से इंतजार था।’

शादी के लिए सोनिया के पिता ने रखी थी यह शर्त

जानकारी के मुताबिक, सोनिया के पिता स्टेफिनो मायनो उनके और राजीव के रिश्ते के बारे में जानकर खुश नहीं हुए। डेटिंग के एक साल बाद राजीव सोनिया के घर उनका हाथ मांगने पहुंचे तो सोनिया के पिता ने एक शर्त रखी कि, वह शादी की बात तभी मानेंगे, जब दोनों एक साल तक किसी से नहीं मिलेंगे और इसके बाद भी अगर दोनों को लगेगा कि वह एक दूजे के बिना नहीं रह सकते तभी शादी की अनुमति मिलेगी।’ राजीव और सोनिया के लिए एक साल अलग रहना मुश्किल था। फिर भी उन्होंने एक-दूसरे के बिना एक साल काटा। दूर रहने पर दोनों का प्यार और ज्यादा गहरा हो गया। फिर सोनिया के पिता ने यह रिश्ता स्वीकार कर लिया।

भारत आकर बच्चन परिवार के घर रुकी थीं सोनिया

जब इंदिरा गांधी ने भी सोनिया को पसंद कर लिया तो 13 जनवरी 1968 को पहली बार सोनिया दिल्ली आईं। इंदिरा गांधी का मानना था कि बगैर शादी के किसी लड़की को घर में रखने की अनुमति परंपराएं नहीं देतीं। उस समय बच्चन परिवार और गांधी परिवार के संबंध बहुत ही घनिष्ठ थे। ऐसे में सोनिया को बच्चन परिवार के घर ठहराया। अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन ने उन्हें भारतीय संस्कृति के तौर तरीकों के बारे में समझाया था। इतना ही नहीं बल्कि तेजी बच्चन ने ही सोनिया को साड़ी पहनना भी सिखाया था। इसी साल सोनिया और राजीव की शादी हुई।

कभी राजनीति में नहीं आना चाहती थीं सोनिया

वर्ष 1983 में सोनिया ने इतावली नागरिकता छोड़कर भारत की नागरिकता हासिल की थी। सोनिया राजनीति में कभी नहीं आना चाहती थीं, लेकिन 1991 में आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी। उस दौरान सोनिया सदमे में थीं और ऐसे में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष बनने से मना कर दिया। सोनिया ने कहा था कि, ‘अपने बच्चों को भीख मांगते हुए देख लूंगी लेकिन राजनीति में नहीं आऊंगी।’ सोनिया ने एक बार यह भी बताया था कि, ‘वह राजनीति में इसलिए आईं क्योंकि कांग्रेस मुश्किल में थी, अगर वो राजनीति में नहीं आतीं तो लोग उन्हें कायर कहते।’

1999 में जीता था पहला चुनाव

1998 में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना सोनिया गांधी के लिए सबसे यादगार पलों में से एक था, क्योंकि वह देश की सबसे पुरानी पार्टी की अध्यक्ष बनी थीं। बता दें सोनिया के जीवन पर आधारित कई फिल्में बन चुकी हैं। सोनिया गांधी ने पहला चुनाव साल 1999 में अमेठी से जीता था। साल 2004 में और 2009 में सोनिया रायबरेली की सांसद बनीं और साथ ही कांग्रेस पार्टी को भी आम चुनाव में जीत दिलाई। सोनिया के कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए की 10 साल तक केंद्र में सरकार रही।

ये भी पढ़े…

पहली नजर में सोनिया को दिल दे बैठे थे राजीव गांधी, करीब आने के लिए दी थी रिश्वत 

किस्सा कुछ यूं हैः केवल सात महीने देश के प्रधानमंत्री रहे थे स्व. चंद्रशेखर, सीधे पहुंच गए थे इस पद पर

किस्सा कुछ यूं हैः धरती पुत्र मुलायम सिंह को पहलवानी के साथ पढ़ाई का भी था शौक

 

 

Related posts