जन्मदिन विशेष: ‘कैंसर’ और ‘ड्रग्स’ ने बना दिया था सुनील दत्त को लाचार, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है उनकी इस फिल्म का नाम

चैतन्य भारत न्यूज

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं में से एक सुनील दत्त का आज जन्मदिन है। सुनील दत्त को गुजरे हुए 15 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन वह आज भी हिंदी सिनेमा में अपने योगदान के लिए याद किए जाते हैं। भले ही सुनील दत्त इंडस्ट्री के सफल अभिनेता और निर्देशक रहे हो लेकिन उनका जीवन संघर्ष से भरा रहा।

झेलम जिले के खुर्द गांव में 6 जून 1929 को जन्में बलराज रघुनाथ दत्त उर्फ सुनील दत्त बचपन से ही अभिनेता बनने की ख्वाहिश रखते थे। उन्होंने बतौर रेडियो जॉकी रेडियो सिलोन पर फिल्मी सितारों के इंटरव्यू से अपने करियर की शुरुआत की थी। सुनील ने अपने सिने करियर की शुरूआत साल 1955 में प्रदर्शित फिल्म ‘रेलवे प्लेटफार्म’ से की। इस फिल्म के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली उसे वह स्वीकार करते चले गए। उस दौरान उन्होंने ‘कुंदन’, ‘राजधानी’, ‘किस्मत का खेल’ और ‘पायल’ जैसी कई बी ग्रेड फिल्मों मे अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई।

सुनील दत्त की किस्मत का सितारा साल 1957 में प्रदर्शित फिल्म ‘मदर इंडिया’ से चमका। इस फिल्म में सुनील का किरदार एंटी हीरो का था। इस फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री नरगिस नजर आईं थीं। सुनील दत्त का फिल्मी करियर सफल रहा। ‘सुजाता’, ‘मदर इंडिया’, ‘रेशमा और शेरा’, ‘मिलन’, ‘नागिन’, ‘जानी दुश्मन’, ‘पड़ोसन’ जैसी फिल्मों के लिए सुनील हमेशा याद किए जाते रहेंगे।

सुनील दत्त ने एक ऐसी फिल्म बनाई थी जिसका नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में भी दर्ज है। यह फिल्म है ‘यादें’ जिसके निर्माता-निर्देशक और अभिनेता सुनील ही थे। ये फिल्म 1964 में रिलीज हुई और ये एक ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म थी। इस फिल्म का नाम सबसे कम कलाकार वाली फिल्म के रूप में गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है। इस फिल्म के आखिरी सीन में नरगिस एक छोटे से किरदार में नजर आई हैं। बाकी फिल्म में सुनील के अलावा कोई और एक्टर नहीं है।

सुनील दत्त ने अभिनेत्री नरगिस से शादी की थी। सुनील दत्त के एक मित्र ने अपने इंटरव्यू के दौरान बताया था कि, ‘सुनील दत्त पूरे जीवनभर असंभव लड़ाइयां लड़ते रहे। अपने बेटे को लगी ड्रग्स की लत छुड़ाने के लिए वो अमेरिका गए। इसके बाद पत्नी नरगिस का इलाज कराने के लिए भी उन्हें दोबारा अमेरिका जाना पड़ा। इन सबके दौरान वो बहुत परेशान रहे। देखा जाए तो उनका जीवन संघर्षपूर्ण ही रहा है।’ फिल्मों के साथ ही उन्होंने राजनीतिक जगत में भी अपनी अलग ही पहचान बना ली थी। लेकिन इतना सब करने के बाद भी सुनील दत्त बेहद लाचार थे। उनकी लाचारी की वजह थी बेटे की ड्रग्स की लत और पत्नी का कैंसर। यूं तो वो अपने जीवन में बेहद खुश थे। बस इन्हीं दोनों चीजों ने उन्हें दुखी कर दिया था। फिर साल 1981 में नरगिस के निधन से वह पूरी तरह से टूट गए थे। सुनील ने 2005 में दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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