दिग्गज अदाकारा शशिकला का 88 की उम्र में निधन, मुश्किलों में गुजरी थी जिंदगी

चैतन्य भारत न्यूज

बॉलीवुड से अब एक बार फिर दुखद खबर आ रही है। रविवार को दोपहर 12 बजे वरिष्ठ अभिनेत्री शशिकला का निधन हो गया है। वह 88 साल की थीं। उनके निधन की खबर राइटर किरन कोट्रियाल ने सोशल मीडिया पर शेयर की है। शशिकला ने अपने करियर में एक से एक बेहतरीन किरदारों को बखूबी पर्दे पर उतारा है।

अमीरी में गुजरा बचपन

शशि का पूरा नाम शशिकला जावलकर है। शशि एक मराठी परिवार से ताल्लुक रखती थी। शशिकला का जन्म 4 अगस्त 1932 में महाराष्ट्र के सोलापुर में हुआ था। उनका परिवार खूब अमीर था और पिता बड़े बिजनसमैन थे। शशिकला को नाचने-गाने और एक्टिंग करने का शौक था। इसलिए सोलापुर जिले के कई शहरों में शशिकला ने कई स्टेज शोज किए थे। उस समय उनकी उम्र महज 5 साल की थी।

पिता हो गए थे कंगाल

एक वक्त ऐसा आया जब शशिकला के पिता कंगाल हो गए और गुजारा करना भी मुश्किल हो गया। कहा जाता है कि शशिकला के पिता को उनके भाइयों से भी धोखा मिला और इस कारण उनकी हालत और भी खराब हो गई थी। तब शशिकला के पिता परिवार को मुंबई ले आए थे। अभिनेत्री बनने से पहले शशिकला ने मजबूरी में लोगों के घरों में नौकरानी का काम किया और काफी स्ट्रगल के बाद उन्हें फिल्मों में काम मिला।

नूरजहां ने बदली किस्मत

मुंबई में शशिकला के पिता ने बेटी के लिए एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो जाकर काम ढूंढना शुरू किया। इसी दौरान शशिकला की मुलाकात एक्ट्रेस और सिंगर नूरजहां से हुई। नूरजहां को वे अच्छी लगीं और उन्होंने अपने पति से कहकर उन्हें फिल्म में काम दिलवा दिया। शशिकला ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1936 में रिलीज हुई फिल्म ‘करोड़पति’ में बाल कलाकार के तौर पर की थी। इसके बाद वह उन्हें 1944 में फिल्म ‘चांद’ में देखा गया। शशिकला ने 1945 में फिल्म ‘जीनत’ में काम किया। इस फिल्म के लिए उन्हें 25 रुपए मिले थे।

पद्मश्री से सम्मानित

फिल्मों के बाद शशिकला ने पिछले टीवी का रुख किया। जहां वे ‘जीना इसी का नाम है’, ‘अपनापन’, ‘दिल देके देखो’, ‘सोनपरी’ में काम किया। वहीं फिल्मों में मां के रोल भी निभाए, जिनमें ‘मदर 98’, ‘परदेसी बाबू’, ‘बादशाह’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘मुझसे शादी करोगी’ और ‘चोरी-चोरी’ जैसी फिल्में शामिल हैं। साल 2007 में शशिकला को पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

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