आज से अधिक मास शुरू, इस माह भूलकर भी न करें ये कार्य, जानें क्या हैं नियम

चैतन्य भारत न्यूज

हिन्दी पंचांग के अनुसार, इस वर्ष मलमास लगने वाला है। इसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। ये महीना भगवान विष्णु और शिव का महीना है। अधिक मास के बारे में शास्त्रों ने कहा है ‘अधिकस्य अधिक फलम्’ अर्थात अधिक मास में शुभ कर्मों का फल भी अधिक मिलता है। मांगलिक (विवाह, गृह प्रवेश आदि) कार्यों के अलावा किसी भी अन्य कार्य के लिए अधिक मास में मनाही नहीं है। पूरे महीने में 25 दिन खरीदारी के लिए शुभ हैं। इस बार मलमास का प्रारंभ 18 सितंबर से हो रहा है, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। उसके बाद 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ होगा।

अधिक मास में ये कार्य होते हैं वर्जित

इस महीने शादी, सगाई, जडुला, गृह निर्माण आरम्भ, गृहप्रवेश, मुंडन, संन्यास अथवा शिष्य दीक्षा लेना, नववधू का प्रवेश, देवी-देवता की प्राण-प्रतिष्ठा, यज्ञ, बड़ी पूजा-पाठ का शुभारंभ, बरसी(श्राद्ध), कूप, बोरवेल, जलाशय खोदने जैसे पवित्र कार्य नहीं किए जाते हैं। मलमास में रोग निवृत्ति के अनुष्ठान, ऋण चुकाने का कार्य, शल्य क्रिया, संतान के जन्म संबंधी कर्म, सूरज जलवा आदि किए जा सकते हैं। इस माह में व्रत, दान, जप करने का अवश्य फल प्राप्त होता है।

क्या है अधिक मास या मलमास

हिन्दू कैलेंडर में 30 तिथियां होती हैं, जिसमें 15 दिनों का कृष्ण पक्ष और 15 दिनों का शुक्ल पक्ष होता है। कृष्ण पक्ष के 15वें दिन अमावस्या और शुक्ल पक्ष के 15वें दिन पूर्णिमा होती है। सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर हिन्दू कैलेंडर बनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर की तिथियां घटती बढ़ती रहती हैं, यह अंग्रेजी कैलेंडर के 24 घंटे के एक दिन जैसे निर्धारित नहीं होती हैं। तीन वर्ष तक जो तिथियां घटती और बढ़ती हैं, उनसे बचे समय से हर तीन वर्ष पर एक माह का निर्माण होता है, जो अधिक मास या मलमास कहलाता है।

मलमास में क्या करें

मलमास के समय में भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है क्योंकि श्रीहरि विष्णु ही इस मास के अधिपति देव हैं। मलमास को पूजा पाठ, स्नान, दान आदि के लिए उत्तम माना गया है। इसमें दान का पुण्य कई गुणा प्राप्त होता है।

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