परम एकादशी व्रत करने से प्राप्त होता है भगवान विष्णु का आशीर्वाद, इस विधि से करें पूजा

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चैतन्य भारत न्यूज

परम एकादशी अधिक मास की आखिरी एकादशी है। पुरुषोत्तम मास कृष्ण पक्ष में आने वाले एकादशी को परम एकादशी भी कहा जाता है। इस बार यह व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस एकादशी व्रत को करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और इसके साथ ही दुर्लभ सिद्धियों की प्राप्ति भी होती है। इस एकादशी में स्वर्ण दान, विद्या दान, अन्न दान, भूमि दान और गौदान करने से जातकों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

परम एकादशी का महत्व

परम एकादशी भगवान विष्णु के भक्तों को परम सुख देने वाली मानी गई हैं। कहा जाता है कि जो भी इस एकादशी का व्रत करता है उस पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली परम एकादशी का व्रत करने वाले जातकों को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। बताया जाता है कि बैकुंठ धाम की प्राप्ति के लिए ऋषि-मुनि और संत आदि हजारों वर्षों तक तपस्या करते हैं। लेकिन एकादशी का व्रत इतना अधिक प्रभावशाली है कि इसके माध्यम से भी बैकुंठ धाम की प्राप्ति संभव है।

परम एकादशी शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि आरंभ – 12 अक्टूबर, सोमवार – दोपहर 4 बजकर 38 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त – 13 अक्टूबर, मंगलवार – दोपहर 2 बजकर 35 मिनट तक
पारण मुहुर्त – 14 अक्टूबर, बुधवार – सुबह 06 बजकर 21 मिनट से 8 बजकर 39 मिनट तक

परम एकादशी व्रत विधि

  • इसके बाद अपने पितरों का श्राद्ध करें।
  • भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करें।
  • ब्राह्मण को फलाहार का भोजन करवायें और उन्हें दक्षिणा दें।
  • इस दिन परमा एकादशी व्रत कथा सुनें।
  • एकादशी व्रत द्वादशी के दिन पारण मुहूर्त में खोलें।

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