कल से शुरू हो रहा है अधिकमास, जानिए हर तीन वर्षों में क्यों आता है मलमास और इसका महत्व

चैतन्य भारत न्यूज

हिन्दी पंचांग के अनुसार, इस वर्ष मलमास लगने वाला है। इसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। ये महीना भगवान विष्णु और शिव का महीना है। अधिक मास के बारे में शास्त्रों ने कहा है ‘अधिकस्य अधिक फलम्’ अर्थात अधिक मास में शुभ कर्मों का फल भी अधिक मिलता है। मांगलिक (विवाह, गृह प्रवेश आदि) कार्यों के अलावा किसी भी अन्य कार्य के लिए अधिक मास में मनाही नहीं है। पूरे महीने में 25 दिन खरीदारी के लिए शुभ हैं।

16 अक्टूबर तक चलेगा मलमास

इस बार मलमास का प्रारंभ 18 सितंबर से हो रहा है, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। उसके बाद 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ होगा। आखिर मलमास क्या है और यह हर तीन वर्ष पर क्यों आता है? मलमास में कौन से कार्यों को करने की मनाही होती है? आइए जाने हैं इसके बारे में।

क्या है मलमास

हिन्दू कैलेंडर में 30 तिथियां होती हैं, जिसमें 15 दिनों का कृष्ण पक्ष और 15 दिनों का शुक्ल पक्ष होता है। कृष्ण पक्ष के 15वें दिन अमावस्या और शुक्ल पक्ष के 15वें दिन पूर्णिमा होती है। सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर हिन्दू कैलेंडर बनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर की तिथियां घटती बढ़ती रहती हैं, यह अंग्रेजी कैलेंडर के 24 घंटे के एक दिन जैसे निर्धारित नहीं होती हैं। तीन वर्ष तक जो तिथियां घटती और बढ़ती हैं, उनसे बचे समय से हर तीन वर्ष पर एक माह का निर्माण होता है, जो अधिक मास या मलमास कहलाता है।

मलमास में क्या करें

मलमास के समय में भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है क्योंकि श्रीहरि विष्णु ही इस मास के अधिपति देव हैं। मलमास को पूजा पाठ, स्नान, दान आदि के लिए उत्तम माना गया है। इसमें दान का पुण्य कई गुणा प्राप्त होता है।

मलमास में कौन से कार्य हैं वर्जित

मलमास के समय में मांगलिक कार्यों जैसे कि विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश आदि की मनाही होती है। शुभ कार्य मलमास के समय में वर्जित होते हैं। हालांकि खरीदारी आदि की मनाही नहीं होती है।

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