वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह पर भड़कीं निर्भया की मां, कहा- ऐसे लोगों के कारण बढ़ रही दुष्कर्म की घटनाएं

asha devi

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के दोषियों की फांसी की सजा माफ करने की अपील की थी, जिस पर अब निर्भया की मां आशा देवी की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।


सोनिया गांधी का दिया उदाहरण

दरअसल इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि, ‘मैं आशा देवी के दर्द और वेदना को समझती हूं, लेकिन मैं मृत्युदंड के खिलाफ हूं। इसलिए अपील करती हूं कि आशा देवी अपनी बेटी के बलात्कारियों की फांसी की सजा माफ कर दें।’ साथ ही इंदिरा जयसिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का उदाहरण देते हुए कहा था कि, ‘सोनिया ने जिस तरह राजीव गांधी हत्याकांड की दोषी नलिनी की मौत की सजा माफ कर दी है, ऐसा ही उदाहरण आशा देवी को पेश करना चाहिए।’

‘वो होती कौन हैं मुझे सलाह देने वाली’

इंदिरा जयसिंह की इसी अपील पर आशा देवी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि, इंदिरा जय सिंह उन्हें सलाह देने वाली कौन होती हैं? उन्होंने आगे कहा कि, पूरा देश चाहता है कि ‘निर्भया’ के दोषियों को फांसी पर जल्द से जल्द लटकाया जाए, ऐसे में इंदिरा जयसिंह कौन होती हैं यह सलाह देने वाली। वो औरत होकर भी एक औरत का दर्द नहीं समझ पा रही हैं। ऐसे लोगों को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। इन लोगों की वजह से ही रेप पीड़ितों के साथ इंसाफ नहीं हो पाता है।

‘ऐसे लोगों के कारण दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ रही’

आशा देवी ने आगे कहा कि, ‘मैं यह सोच भी नहीं सकती कि इंदिरा जयसिंह ने कैसे निर्भया के दोषियों को माफ करने की अपील की। मैं सुप्रीम कोर्ट में उनसे कई बार मिली हूं, लेकिन एक बार भी उन्होंने इस बारे में मुझसे बात नहीं की और आज वो दोषियों को माफी देने की बात कर रही हैं। मैं हैरान हूं। दुष्कर्म करने वाले अपराधियों को माफी देने वाले ऐसे लोग मानवाधिकार के नाम पर धब्बा हैं। इन्हीं लोगों की वजह से देश में दुष्कर्म जैसी घटनाएं नहीं रुक रही हैं।’

गांधी परिवार ने की थी सजा माफ

बता दें राजीव गांधी हत्याकांड में नलिनी दोषी पाई गई है। साल 1991 में उन्हें इस मामले में जेल भेजा गया था। वह 26 सालों से जेल में ही बंद है। साल 2008 में प्रियंका गांधी वाड्रा ने जेल में नलिनी से मुलाकात भी की थी। गांधी परिवार ने उन्हें माफ कर दिया है।

एक फरवरी को होगी फांसी

16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भयाकांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। दिल्ली की रहने वाली 23 वर्षीय निर्भया के साथ चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और फिर उसकी बुरी तरह पिटाई की गई। बाद में अस्पताल में निर्भया की मौत हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से एक नाबालिग था। नाबालिग को रिहा कर दिया गया, जबकि एक और दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। बचे अन्य 4 दोषियों को फांसी होनी है।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की तारीख 22 जनवरी तय की थी, लेकिन शुक्रवार को कोर्ट ने फांसी की तारीख बदलकर नया डेथ वारंट जारी किया। दरअसल, एक दोषी मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की थी। जिसके बाद शुक्रवार को राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी और फिर पटियाला कोर्ट ने फांसी देने की नई तारीख की घोषणा की। अब चारों दोषियों को 1 फरवरी सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा।

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