अंधविश्वास : दिवाली आते ही उल्लुओं की जान खतरे में पड़ी, बलि चढ़ाने के लिए लाखों खर्च कर इसे खरीद रहे लोग

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चैतन्य भारत न्यूज

लखीमपुर खीरी. जल्द ही दिवाली आने वाली है और ऐसे में उल्लुओं की जान पर खतरा मंडरा रहा है। दरअसल दिवाली पर कुछ लोग तंत्र साधना और सिद्धि पाने के लिए उल्लुओं की बलि देने जैसे अंधविश्वास के चलते इस लुप्तप्राय पक्षी की जान ले लेते हैं। उत्तरप्रदेश के लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व में भी उल्लुओं के दुश्मन एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में वन विभाग को अलर्ट पर रखा गया है।


दुधवा में पाए जाते 12 प्रजाति के उल्लू

जानकारी के मुताबिक, भारत-नेपाल बॉर्डर से सटे हुए दुधवा टाइगर रिजर्व में करीब 12 प्रजाति के उल्लू पाए जाते हैं। इनमें से कुछ प्रजाति बेहद दुर्लभ हैं। दिवाली आते ही लोग उल्लुओं को पकड़ने निकल जाते हैं, इसलिए दुधवा पार्क प्रशासन ने उल्लुओं की सुरक्षा के लिए दुधवा पार्क को अलर्ट मोड पर रखा है। यहां गश्त के साथ ही नाईट पेट्रोलिंग भी की जाती है। इसके अलावा जंगल के जिन भी इलाकों में वाहन नहीं जा पाते हैं, वहां हाथी पर सवार होकर गश्त की जा रही है।

उल्लुओं की कीमत 20 से 30 लाख रुपए

उल्लू देवी लक्ष्मी का वाहन है। लेकिन कुछ अंधविश्वासी तांत्रिक और अघोरियों का मानना है कि अगर दिवाली की रात में विशेष नक्षत्र पर तंत्र-मंत्र क्रिया द्वारा उल्लू की बलि दी जाए तो सभी मनोकामना पूर्ण होती है। सूत्रों के मुताबिक, इसी अंधविश्वास के चलते दिल्ली, मुंबई समेत कई बड़े महानगरों में लोग एक उल्लू को 20 से 30 लाख रुपए में तस्करों से चोरी-छिपे खरीद रहे हैं। गाजियाबाद में पुलिस ने दो दिन पहले ही दो लोगों को दुर्लभ प्रजाति के उल्लू को पांच उल्लुओं के साथ गिरफ्तार किया था। जानकारी के मुताबिक, यह तस्कर किसी अघोरी के माध्यम से इन उल्लुओं को एक करोड़ से ज्यादा कीमत पर बेचने के लिए लाए थे, लेकिन समय रहते पुलिस ने दोनों तस्करों को गिरफ्तार कर लिया।

उल्लू से जुड़ा ये है अंधविश्वास

दुधवा बफर जोन के डीएफओ अनिल पटेल ने बताया कि, दिवाली पर उल्लुओं की बलि देने की भ्रामक प्रथा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि उल्लुओं की बलि देने पर माता लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। एक अन्य तांत्रिक के मुताबिक, दिवाली पर एक विशेष पूजा की जाती है। इस दिन सभी साधु और तांत्रिक तंत्र सिद्धि पाने के लिए 42 दिनों की विशेष पूजा करते हैं। इस पूजा के अंतिम दिन उल्लुओं की बलि दी जाती है। लेकिन लोगों को यह नहीं समझ आता कि, किसी जानवर की बलि देने से आखिर कैसे धन की प्राप्ति होती है। धन की प्राप्ति के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।

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